फ़ूड और रेस्टोरेंट बिज़नेस

Friday नाइट — विक्रम की किचन में

शुक्रवार की रात 8:15 बज रहे हैं, देहरादून में। विक्रम का फ़्रेंचाइज़ी रेस्टोरेंट — एक फ़ेमस बिरयानी ब्रांड — फ़ुल स्विंग में है। Swiggy टैबलेट बिना रुके बीप कर रहा है: पिछले तीन घंटे में 47 ऑर्डर्स। डाइन-इन की हर टेबल भरी हुई है। दो डिलीवरी राइडर्स काउंटर पर खड़े हैं, हेलमेट पहने, फ़ोन स्क्रॉल कर रहे हैं। किचन में चार स्टाफ़ क्लॉकवर्क की तरह चल रहे हैं — एक तंदूर पर, एक प्लेटिंग कर रहा है, एक डिलीवरी ऑर्डर्स पैक कर रहा है, एक बर्तन धो रहा है इतनी स्पीड से कि स्टील की आवाज़ गूँज रही है।

बाहर से देखो तो ड्रीम लगता है। पैक्ड हाउस। ऑर्डर्स बह रहे हैं। ब्रांड नेम नियॉन में चमक रहा है।

लेकिन जो नहीं दिखता वो ये है: पिछले महीने मुनाफ़ा सिर्फ ₹38,000 था। राजस्व ₹4.2 लाख पर। रेंट, स्टाफ़ तनख़्वाह, रॉ मटीरियल, फ़्रेंचाइज़ी रॉयल्टी, Swiggy कमीशन, इलेक्ट्रिसिटी, गैस, पैकेजिंग, GST निकालो — विक्रम ने महीने में उतना कमाया जितना उसका प्रबंधक कमाता है।

"लोग सोचते हैं रेस्टोरेंट में पैसा ही पैसा है," विक्रम बोलता है, काउंटर ख़ुद साफ़ करते हुए क्योंकि एक मददर ने छुट्टी ले ली। "14 घंटे की ड्यूटी, सड़ा हुआ स्टॉक, डिलीवरी रिफ़ंड्स, बिना बताए भागने वाले स्टाफ़ — ये कोई नहीं देखता।"

ये चैप्टर फ़ूड बिज़नेस के बारे में है — सबसे पॉपुलर, सबसे रोमैंटिसाइज़्ड, और सबसे ब्रूटल उद्योगों में से एक। हर कोई सोचता है कि रेस्टोरेंट चला सकता है। बहुत कम लोग समझते हैं कि असलीी क्या लगता है।

अगर तुम ये पढ़ रहे हो और फ़ूड बिज़नेस सोच रहे हो — अच्छा है। लेकिन एक भी रुपया निवेश करने से पहले ये चैप्टर ध्यान से पढ़ो।


फ़ूड बिज़नेस के टाइप्स

"फ़ूड बिज़नेस" एक चीज़ नहीं है। ये एक स्पेक्ट्रम है, और हर टाइप की इकोनॉमिक्स अलग है:

1. फ़ुल-सेवा रेस्टोरेंट (डाइन-इन)

फ़िज़िकल जगह जहाँ ग्राहक आता है, बैठता है, खाता है, पे करता है। जगह चाहिए, फ़र्नीचर, किचन, स्टाफ़, एम्बिएंस, पार्किंग — और लिकर सर्व करते हो तो लाइसेंस भी।

निवेश: ₹10-50 लाख+ (सिटी और साइज़ पर निर्भर) ब्रेक-ईवन: आम तौर पर 12-24 महीने सबसे बड़ी चुनौती: हाई फ़िक्स्ड लागतें (रेंट + स्टाफ़) — ग्राहक आए या ना आए

2. ढाबा / कैज़ुअल ईटरी

आसान सेटअप। कम फ़्रिल्स। अक्सर रोडसाइड या बस स्टैंड और मार्केट के पास। कम निवेश, जल्दी ब्रेक-ईवन, लेकिन मार्जिन्स पतली क्योंकि दामेज़ कम होते हैं।

निवेश: ₹2-8 लाख सबसे बड़ी चुनौती: कम दाम पर निरंतरता और हाइजीन बनाए रखना

3. क्लाउड किचन (सिर्फ डिलीवरी)

नो डाइन-इन। नो फ़्रंट-ऑफ़-हाउस स्टाफ़। महँगा जगह की ज़रूरत नहीं। बस एक किचन किसी लो-रेंट इलाक़ा में, डिलीवरी ऐप्स के लिए खाना बनाना।

निवेश: ₹3-10 लाख सबसे बड़ी चुनौती: 100% डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म्स पर निर्भर — और उनका कमीशन

4. कैटरिंग

इवेंट्स के लिए खाना बनाना — शादी, कॉर्पोरेट फ़ंक्शन, पार्टी। फ़िक्स्ड जगह ज़रूरी नहीं। राजस्व बड़े चंक्स में आता है लेकिन इर्नियमित।

निवेश: ₹2-5 लाख (इक्विपमेंट + ट्रांसपोर्ट) सबसे बड़ी चुनौती: सीज़नल माँग, हर इवेंट में बड़ा अपफ़्रंट ख़र्च, रेप्युटेशन पर निर्भर

5. टिफ़िन सेवा / सब्सक्रिप्शन मील्स

डेली मील्स — दफ़्तरेज़, PG, बैचलर फ़्लैट्स, हॉस्टल्स को डिलीवर करना। प्रिडिक्टेबल रिकरिंग राजस्व।

निवेश: ₹1-3 लाख सबसे बड़ी चुनौती: लॉजिस्टिक्स, निरंतरता, पतली मार्जिन्स

6. पैकेज्ड फ़ूड (FMCG)

एक फ़ूड उत्पाद बनाना — अचार, चिप्स, मसाला मिक्स, नमकीन, हेल्थ बार्स — पैकेज करना, रिटेल या ऑनलाइन बेचना।

निवेश: ₹2-15 लाख (स्केल और कम्प्लायंस पर निर्भर) सबसे बड़ी चुनौती: FSSAI कम्प्लायंस, शेल्फ़ लाइफ़, डिस्ट्रिब्यूशन, ब्रांडिंग

7. बेकरी / कन्फ़ेक्शनरी

केक्स, ब्रेड, कुकीज़, पेस्ट्रीज़। फ़िज़िकल शॉप, होम-बेस्ड, या डिलीवरी-ओनली — कोई भी मॉडल।

निवेश: ₹3-12 लाख सबसे बड़ी चुनौती: जल्दी ख़राब होना, हुनर पर निर्भरता, इक्विपमेंट की लागत

8. फ़ूड ट्रक

मोबाइल फ़ूड बिज़नेस। कम रेंट (बस पार्किंग फ़ीज़), नयापन, लेकिन लिमिटेड मेन्यू और मौसम पर निर्भर।

निवेश: ₹5-15 लाख (ट्रक + इक्विपमेंट + परमिट्स) सबसे बड़ी चुनौती: परमिट्स, पार्किंग, लिमिटेड कैपेसिटी, मौसम

पहले मॉडल चूज़ करो, फिर निवेश करो। जो इंसान कोज़ी कैफ़े का सपना देख रहा है और क्लाउड किचन चलाने लगे — ख़ुश नहीं रहेगा। जो फ़ुल रेस्टोरेंट खोल दे जबकि टिफ़िन सेवा से टेस्ट करना चाहिए था — कैपिटल जलेगी। मॉडल को अपनी कैपिटल, हुनर, और लाइफ़स्टाइल से मैच करो।


फ़ूड लागत गणना: 30% का नियम

फ़ूड बिज़नेस का सबसे इम्पॉर्टेंट नंबर। ये ग़लत हो गया तो कितना भी बेचो — बचेगा कुछ नहीं।

फ़ूड लागत सेलिंग दाम का लगभग 30% होना चाहिए।

मतलब? अगर एक प्लेट राजमा-चावल ₹120 में बेचते हो, तो उसमें इंग्रीडिएंट्स — राजमा, चावल, तेल, मसाला, प्याज, टमाटर, गार्निश — की लागत लगभग ₹36 होनी चाहिए।

Food Cost % = (इंग्रीडिएंट्स की लागत / सेलिंग दाम) × 100

टारगेट: 28-35% ज़्यादातर फ़ूड बिज़नेसेज़ के लिए

विक्रम की बिरयानी का ब्रेकडाउन:

आइटमसेलिंग दामइंग्रीडिएंट लागतफ़ूड लागत %
चिकन बिरयानी₹299₹9531.8%
पनीर बिरयानी₹249₹7228.9%
रायता (200ml)₹49₹816.3%
कोल्ड ड्रिंक (कैन)₹60₹3558.3%
गुलाब जामुन (2 pcs)₹69₹1217.4%

देखा? बिरयानी — हीरो आइटम — 30% के आस-पास चल रहा है। रायता और गुलाब जामुन हाई-मार्जिन ऐड-ऑन्स हैं। कोल्ड ड्रिंक बुरी मार्जिन है (ब्रांडेड MRP, ज़्यादा नहीं बेच सकते)। इसीलिए विक्रम कॉम्बोज़ पुश करता है जिनमें रायता और डेज़र्ट — ओवरऑल फ़ूड लागत कम आती है।

बाक़ी 70% कहाँ जाता है: रेंट, तनख़्वाहज़, इलेक्ट्रिसिटी, गैस, पैकेजिंग, डिलीवरी कमीशन, बनाए रखेंस, मार्केटिंग, लोन EMI, और आख़िर में — तुम्हारा मुनाफ़ा।

अगर फ़ूड लागत 40-45% पहुँच गई — मुश्किल है। 50% से ऊपर — तो हर प्लेट पर घाटा हो रहा है।

पुष्पा दीदी की चाय की फ़ूड लागत लगभग 40% है (₹8 लागत, ₹20 सेलिंग दाम)। लेकिन उनका स्टाफ़ लागत लगभग ज़ीरो है (एक मददर), डिलीवरी कमीशन नहीं, रेंट बहुत कम। उनका मॉडल काम करता है क्योंकि बाक़ी लागतें बहुत कम हैं। सिर्फ फ़ूड लागत % से लाभप्रदता तय नहीं होती — पूरी लागत स्ट्रक्चर मायने रखती है।

फ़ूड लागत गणना कैसे ट्रैक करें

  1. रेसिपी कार्ड्स: हर डिश लिखो — एग्ज़ैक्ट इंग्रीडिएंट्स और क्वांटिटीज़। ये तुम्हारी स्टैंडर्ड रेसिपी है। बिज़नेस किचन में "अंदाज़े से" नहीं चलता।

  2. यील्ड ट्रैकिंग: 1 kg चिकन से 1 kg कुक्ड मीट नहीं मिलता। हड्डी, पानी, ट्रिमिंग — असली यील्ड 65-70% होता है। ये फ़ैक्टर करो।

  3. वीकली स्टॉक-टेकिंग: हर हफ़्ते इन्वेंटरी गिनो। कितना ख़रीदा vs कितना इस्तेमाल होना चाहिए था (सेल्स के हिसाब से)। फ़र्क़ = वेस्ट, चोरी, या ग़लत पोर्शनिंग।

  4. प्लेट लागत vs मेन्यू दाम: मेन्यू की हर एक आइटम की गणनाेड प्लेट लागत होनी चाहिए। मंथली अपडेट करो क्योंकि इंग्रीडिएंट दामेज़ बदलती हैं — ख़ास तौर पर सब्ज़ी, चिकन, और तेल।


मेन्यू इंजीनियरिंग: स्टार्स, वर्कहॉर्सेज़, पज़ल्स, और डॉग्स

मेन्यू की हर आइटम बराबर नहीं होती। मेन्यू इंजीनियरिंग एक फ़्रेमवर्क है जो डिशेज़ को चार श्रेणियाँ में बाँटता है: पॉपुलैरिटी (कितने ऑर्डर्स) और लाभप्रदता (कितना मार्जिन)।

हाई पॉपुलैरिटीलो पॉपुलैरिटी
हाई मुनाफ़ास्टार्सपज़ल्स
लो मुनाफ़ावर्कहॉर्सेज़डॉग्स

स्टार्स (ज़्यादा पॉपुलर + ज़्यादा मुनाफ़ा)

तुम्हारी बेस्ट आइटम्स। इन्हें एग्रेसिवली प्रमोट करो। मेन्यू में पहले रखो। फ़ोटोज़ में फ़ीचर करो। ये आइटम्स तुम्हारा बिज़नेस कैरी करती हैं।

विक्रम के मेन्यू में: चिकन बिरयानी कॉम्बो (बिरयानी + रायता + गुलाब जामुन)। बार-बार ऑर्डर होता है, कॉम्बो पर अच्छी मार्जिन।

वर्कहॉर्सेज़ (ज़्यादा पॉपुलर + कम मुनाफ़ा)

ग्राहकों को बहुत पसंद, लेकिन मार्जिन पतली। हटा नहीं सकते (ग्राहक उम्मीद रखते हैं), लेकिन मार्जिन सुधार करने की कोशिश करो — इंग्रीडिएंट्स सस्ते नेगोशिएट करो, पोर्शन थोड़ा कम करो, दाम ₹10-20 बढ़ाओ अगर मार्केट अलाउ करे।

विक्रम के मेन्यू में: प्लेन चिकन बिरयानी बिना कॉम्बो। सब ऑर्डर करते हैं, लेकिन ऐड-ऑन्स के बिना मार्जिन कम।

पज़ल्स (कम पॉपुलर + ज़्यादा मुनाफ़ा)

बढ़िया मार्जिन, लेकिन कोई ऑर्डर नहीं करता। या तो मार्केटिंग वीक है, नाम अपीलिंग नहीं, या ग्राहक बेस में फ़िट नहीं। रिपोज़िशन करो — बेटर डिस्क्रिप्शन, वेटर रिकमेंडेशन्स, लिमिटेड-टाइम पेशकश।

विक्रम के मेन्यू में: मटन बिरयानी। एक्सीलेंट मार्जिन, लेकिन देहरादून में ₹449 पर ज़्यादातर चिकन ले लेते हैं।

डॉग्स (कम पॉपुलर + कम मुनाफ़ा)

कोई ऑर्डर नहीं करता, और करे भी तो पैसा नहीं बनता। ये आइटम्स मेन्यू क्लटर्ड करती हैं, इन्वेंटरी वेस्ट होती है, किचन स्लो होती है। हटा दो।

विक्रम के मेन्यू में: वेज फ़्राइड राइस। कम ऑर्डर (लोग बिरयानी लेने आते हैं, फ़्राइड राइस नहीं), मार्जिन भी ख़राब।

एक्शन: हर क्वार्टर अपना मेन्यू समीक्षा करो। हर आइटम वर्गीकृत करो। स्टार्स प्रमोट करो, वर्कहॉर्सेज़ ऑप्टिमाइज़ करो, पज़ल्स फ़िक्स या रिपोज़िशन करो, डॉग्स हटाओ। छोटा ध्यान्ड मेन्यू हमेशा बड़े बिखरे मेन्यू से बेहतर होता है।


किचन कुशलता और वेस्ट प्रबंधन

फ़ूड वेस्ट = मुनाफ़ा कूड़ेदान में फेंकना। India में एवरेज रेस्टोरेंट 15-20% फ़ूड वेस्ट करता है जो ख़रीदता है। मार्जिन्स के लिए ये तबाही है।

वेस्ट कहाँ से आता है

  1. ज़रूरत से ज़्यादा ख़रीदना: "कम पड़ गया तो?" — ख़ास तौर पर पेरिशेबल आइटम्स (सब्ज़ी, डेयरी, मीट) में।

  2. ख़राब स्टोरेज: टमाटर सड़ गए क्योंकि फ़्रिज में नहीं रखे। मसालों की पोटेंसी गई क्योंकि कंटेनर बंद नहीं था। तेल रैंसिड हो गया।

  3. ओवर-पोर्शनिंग: रेसिपी बोलती है 250g चावल पर प्लेट, कुक डाल रहा है 350g क्योंकि "अच्छा लगता है।" 100 प्लेट्स पर 10 kg एक्स्ट्रा चावल — करीब ₹400 डेली वेस्ट, ₹12,000 मंथली।

  4. प्रेप वेस्ट: छिलका, काटना, ट्रिमिंग। ट्रेंड कुक कम वेस्ट करता है।

  5. बिगड़े ऑर्डर्स: खाना वापस आया, ग़लत आइटम बना, डिलीवरी रिटर्न।

वेस्ट कैसे कम करें

  • FIFO (First In, First Out): पुराना स्टॉक पहले इस्तेमाल करो। हर चीज़ पर ख़रीदने की डेट लिखो।
  • स्टैंडर्डाइज़्ड पोर्शन्स: मेज़रिंग टूल्स इस्तेमाल करो — ख़ास साइज़ के लैडल्स, वेइंग स्केल, पोर्शनिंग कंटेनर्स। "अंदाज़े से" नहीं।
  • डेली प्रेप योजना: कल कितनी माँग होगी — पास्ट डेटा से एस्टिमेट करो। 80 कवर्स एवरेज हैं तो 200 के लिए प्रेप मत करो।
  • क्रॉस-यूटिलाइज़ेशन: बासी ब्रेड से क्रूटॉन्स। सब्ज़ी के छिलकों से स्टॉक। ज़्यादा पके टमाटर से सॉस। क्रिएटिव रीइस्तेमाल वेस्ट कम करता है।
  • स्टाफ़ प्रशिक्षण: लाइन कुक्स को समझाओ — वेस्ट = पैसा बर्बाद। उनके KPI का हिस्सा बनाओ।

विक्रम ने पोर्शन कंट्रोल और FIFO इम्प्लीमेंट करके तीन महीने में फ़ूड वेस्ट 18% से 9% कर दिया। बचत: करीब ₹25,000 पर मंथ — पिछले मुनाफ़ा का आधे से ज़्यादा।


FSSAI लाइसेंस

India में हर फ़ूड बिज़नेस को FSSAI लाइसेंस चाहिए। कोई एक्सेप्शन नहीं। तीन टाइप्स हैं:

1. बुनियादी रजिस्ट्रेशन

  • किसके लिए: छोटे बिज़नेसेज़ — एनुअल टर्नओवर ₹12 लाख तक
  • उदाहरण: स्ट्रीट वेंडर्स, होम-बेस्ड फ़ूड बिज़नेस, छोटी टिफ़िन सेवा
  • फ़ी: ₹100 पर ईयर
  • प्रक्रिया: FSSAI वेबसाइट पर आसान ऑनलाइन फ़ॉर्म। 7-15 दिन में अप्रूव।

2. स्टेट लाइसेंस

  • किसके लिए: एनुअल टर्नओवर ₹12 लाख से ₹20 करोड़ के बीच
  • उदाहरण: रेस्टोरेंट्स, मीडियम-स्केल मैन्युफ़ैक्चरर्स, कैटरिंग
  • फ़ी: ₹2,000-5,000 पर ईयर
  • प्रक्रिया: स्टेट के फ़ूड सेफ़्टी डिपार्टमेंट में लागू करो। इंस्पेक्शन हो सकता है।

3. सेंट्रल लाइसेंस

  • किसके लिए: एनुअल टर्नओवर ₹20 करोड़ से ऊपर, या मल्टीपल स्टेट्स में ऑपरेट करने वाले
  • उदाहरण: बड़े मैन्युफ़ैक्चरर्स, इम्पोर्टर्स, ई-कॉमर्स फ़ूड प्लेटफ़ॉर्म्स
  • फ़ी: ₹7,500 पर ईयर
  • प्रक्रिया: सेंट्रल FSSAI दफ़्तर में लागू। डीटेल्ड डॉक्यूमेंटेशन और इंस्पेक्शन्स।

तुम्हें कौन सा चाहिए?

बिज़नेस टाइपलाइकली लाइसेंस
पुष्पा दीदी की चाय की दुकानबुनियादी रजिस्ट्रेशन
विक्रम का फ़्रेंचाइज़ी रेस्टोरेंटस्टेट लाइसेंस
अंकिता का पैकेज्ड अचार (सिर्फ उत्तराखंड में)स्टेट लाइसेंस
अंकिता का पैकेज्ड अचार (Amazon पर पैन-India)सेंट्रल लाइसेंस
होम बेकर सेलिंग ऑन Instagramबुनियादी रजिस्ट्रेशन
क्लाउड किचन — ₹15 लाख/ईयर राजस्वस्टेट लाइसेंस

ये छोड़ना मत करो। बिना FSSAI रजिस्ट्रेशन के फ़ूड बिज़नेस चलाना इल्लीगल है। पेनल्टी ₹2 लाख से ₹10 लाख तक। व्यावहारिकी: Swiggy, Zomato, Amazon, Flipkart — कोई भी तुम्हें बिना वैलिड FSSAI नंबर के लिस्ट नहीं करेगा। हर फ़ूड लेबल पर प्रिंट होता है। ग्राहकों चेक करते हैं।


हाइजीन और फ़ूड सेफ़्टी

ये सेक्शन नॉन-नेगोशिएबल है। सिर्फ नियम की वजह से नहीं — बल्कि इसलिए कि लोग तुम्हारा बनाया खाना खा रहे हैं। उनकी हेल्थ तुम्हारे हाथ में है।

बुनियादी्स जो हर फ़ूड बिज़नेस को पालन करने ही हैं

  1. किचन हमेशा क्लीन. "दिन में एक बार साफ़ कर लिया" — ये काफ़ी नहीं। हर ऑर्डर के बीच काउंटरटॉप्स, चॉपिंग बोर्ड्स, इक्विपमेंट — वाइप डाउन। कोई कॉम्प्रोमाइज़ नहीं।

  2. हैंडवॉशिंग. हर स्टाफ़ मेंबर — खाना सँभालने से पहले, रॉ मीट छूने के बाद, वॉशरूम जाने के बाद हाथ धोए। सोप और पानी। एप्रन पर हाथ पोंछना हैंडवॉशिंग नहीं है।

  3. रॉ और कुक्ड अलग. सेम काउंटर पर रॉ चिकन और पका हुआ चावल = फ़ूड पॉइज़निंग। अलग चॉपिंग बोर्ड्स, अलग स्टोरेज, अलग बर्तन।

  4. टेम्प्रेचर कंट्रोल. गरम खाना गरम रहे (60°C से ऊपर)। ठंडा खाना ठंडा रहे (5°C से नीचे)। 5°C-60°C के बीच का "डेंजर ज़ोन" — बैक्टीरिया सबसे तेज़ बढ़ते हैं। रूम टेम्प्रेचर पर 2 घंटे से ज़्यादा खाना मत छोड़ो।

  5. पेस्ट कंट्रोल. मंथली ट्रीटमेंट। दरवाज़े बंद। खाना ढका हुआ। रोडेंट ड्रॉपिंग्स चेक करो। किचन में कॉकरोच = बंद होने का ख़तरा।

  6. पानी की गुणवत्ता. पानी टेस्ट करवाओ। ग्राहकों को सर्व होने वाला पानी RO/UV हो। कुकिंग वॉटर भी क्लीन हो।

  7. स्टाफ़ हेल्थ. बुख़ार, खाँसी, डायरिया, स्किन इन्फ़ेक्शन — कोई भी कुक इस कंडीशन में खाना सँभालना नहीं करेगा। "एडजस्ट कर लो" नहीं चलेगा।

  8. स्टोरेज पर डेट लेबल्स. फ़्रिज का हर कंटेनर डेटेड हो। कोई मिस्ट्री बॉक्स नहीं। "डाउट हो तो फेंक दो।"

एक फ़ूड पॉइज़निंग इंसिडेंट रेस्टोरेंट तबाह कर सकता है। Google या Zomato पर एक बैड समीक्षा — "यहाँ खाकर बीमार हो गया" — 100 अच्छे समीक्षाज़ से वसूल नहीं होगा। हाइजीन ख़र्चा नहीं है — इंश्योरेंस है।


डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म्स: Swiggy/Zomato का ट्रैप

चलो बड़ी बात करते हैं।

2024-25 में Swiggy और Zomato मिलकर India के करीब 75% ऑनलाइन फ़ूड ऑर्डर्स प्रक्रिया करते हैं। फ़ूड बिज़नेस में डिलीवरी ऑर्डर्स चाहिए तो ऑलमोस्ट सर्टेनली इन दोनों में से एक या दोनों पर होना पड़ेगा।

लेकिन ये चार्ज करते हैं:

फ़ी टाइपटिपिकल रेंज
कमीशन पर ऑर्डर18-25% ऑर्डर वैल्यू का
पेमेंट गेटवे फ़ी2-3%
GST ऑन कमीशन18% (कमीशन अमाउंट पर)
छूट शेयरिंग (अगर कोई हो)वेरिएबल

कुल इफ़ेक्टिव कट: 22-30% तुम्हारे ऑर्डर वैल्यू का।

उदाहरण: ग्राहक ने Swiggy पर ₹500 की बिरयानी ऑर्डर की। असलीी क्या होता है:

ग्राहक पेज़:                      ₹500
Swiggy कमीशन (22%):             - ₹110
पेमेंट गेटवे (2.5%):            - ₹12.50
GST ऑन कमीशन (18%):            - ₹19.80
-----------------------------------------
तुम्हें मिलता है:                  ₹357.70

फ़ूड लागत (30%):               - ₹150
पैकेजिंग:                       - ₹25
-----------------------------------------
बाक़ी रेंट, स्टाफ़ etc के लिए:    ₹182.70

₹500 के ऑर्डर पर तुम्हें ₹357 मिलते हैं। फ़ूड लागत + पैकेजिंग निकालो — ₹182 बचे बाक़ी सब के लिए। टाइट है।

तो डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म्स छोड़ दें?

नहीं। लेकिन स्ट्रैटेजिक बनो:

  1. डिस्कवरी के लिए इस्तेमाल करो, निर्भरेंसी के लिए नहीं। Swiggy से नया ग्राहक ऑर्डर करे तो पैकेजिंग में एक फ़्लायर डालो: "सीधा ऑर्डर करें: कॉल/WhatsApp [नंबर] — 10% ऑफ़।" सीधा चैनल बिल्ड करो।

  2. दाम अलग रखो। बहुत रेस्टोरेंट्स Swiggy/Zomato पर 10-15% ज़्यादा चार्ज करते हैं डाइन-इन से। ये लीगल है और आम है। "डिलीवरी मेन्यू" दामेज़ कमीशन एब्ज़ॉर्ब करने के लिए सेट करो।

  3. डिलीवरी मेन्यू ऑप्टिमाइज़ करो। डाइन-इन मेन्यू की हर आइटम डिलीवरी पर ना रखो। जो ट्रैवल में ख़राब होती हैं, कम मार्जिन वाली, कॉम्प्लेक्स पैकेजिंग वाली — हटाओ।

  4. रेटिंग पर नज़र रखो। डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म्स पर रेटिंग = लाइफ़लाइन। 4.0 से नीचे गए तो विज़िबिलिटी गिर जाती है। समीक्षाज़ का जवाब दो। रिकरिंग कम्प्लेंट्स फ़िक्स करो। खाना ऐसे पैक करो कि पहुँचने पर अच्छा दिखे।

  5. सीधा ऑर्डरिंग पर सोचो। Thrive, Petpooja, DotPe जैसे टूल्स से अपना ऑर्डरिंग सिस्टम बनाओ — फ़ीज़ बहुत कम (2-5%)। नियमित ग्राहकों के लिए WhatsApp ऑर्डरिंग कम्बाइन करो।


क्लाउड किचन मॉडल

क्लाउड किचन (गोस्ट किचन / डार्क किचन) एक फ़ूड बिज़नेस है जिसमें नो डाइन-इन, नो स्टोरफ़्रंट, नो वेटर्स। बस किचन, डिलीवरी के लिए कुकिंग।

फ़ायदे

  • कम निवेश: फ़ैंसी जगह नहीं, फ़र्नीचर नहीं, डेकोर नहीं। 200-300 sq ft किचन किसी बैक लेन में काफ़ी।
  • कम रेंट: फ़ुट ट्रैफ़िक ज़रूरी नहीं। बैक लेन्स, इंडस्ट्रियल इलाक़ाज़, बेसमेंट्स — जहाँ रेंट सस्ता हो।
  • एक किचन से मल्टीपल ब्रांड्स: "विक्रम्स बिरयानी" और "देसी बाउल" और "रैप हाउस" — सेम किचन, सेम स्टाफ़, अलग मेन्इस्तेमाल, अलग डिलीवरी ऐप्स।
  • जल्दी शुरू: फ़ैसला से फ़र्स्ट ऑर्डर तक 45-60 दिन। फ़ुल रेस्टोरेंट में 4-6 महीने लगते हैं।

नुक़सानेज़

  • 100% प्लेटफ़ॉर्म-निर्भर: Swiggy या Zomato ने एल्गोरिदम, कमीशन, पॉलिसी बदली — तुम उनकी मर्सी पर हो।
  • ग्राहक रिश्ता नहीं: ग्राहक कभी दिखता नहीं। लॉयल्टी नहीं। वो प्लेटफ़ॉर्म के लॉयल हैं, तुम्हारे नहीं।
  • क्राउडेड स्पेस: देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश जैसे सिटीज़ में क्लाउड किचन्स बहुत बढ़ गई हैं। कॉम्पिटिशन फ़ियर्स है।
  • गुणवत्ता परसेप्शन: कुछ ग्राहकों क्लाउड किचन को लोअर गुणवत्ता मानते हैं क्योंकि कोई फ़िज़िकल रेस्टोरेंट नहीं दिखता।

विक्रम के दोस्त गौरव की क्लाउड किचन

गौरव ने देहरादून के पटेल नगर में क्लाउड किचन शुरू की — 300 sq ft, ₹8,000 रेंट। दो ब्रांड्स चलाता है: एक बिरयानी, एक मोमोज़। कुल निवेश: ₹4.5 लाख।

मंथली राजस्व: ₹2.8 लाख फ़ूड लागत (32%): ₹89,600 रेंट: ₹8,000 स्टाफ़ (2 कुक्स + 1 मददर): ₹35,000 पैकेजिंग: ₹18,000 प्लेटफ़ॉर्म कमीशन्स (~24%): ₹67,200 इलेक्ट्रिसिटी + गैस: ₹12,000 अदर: ₹8,000 मंथली मुनाफ़ा: ~₹42,200

विक्रम के फ़्रेंचाइज़ी से बेहतर — एक-तिहाई निवेश पर। लेकिन गौरव 12 घंटे काम करता है, ख़ुद डिलीवरी इश्इस्तेमाल सँभालता है, और एक बैड रेटिंग से ऑर्डर्स गिरने का डर हमेशा रहता है।


पैकेज्ड फ़ूड बिज़नेस: अंकिता की कहानी

अंकिता बागेश्वर में पली-बढ़ी। उसकी दादी पूरी वैली में सबसे अच्छा मिक्स अचार बनाती थीं — चार पीढ़ियों से चला आ रहा रेसिपी, लोकल पहाड़ी मसाले और सीज़नल इंग्रीडिएंट्स। कॉलेज के बाद अंकिता ने तय किया कि इसे बिज़नेस बनाएगी।

शुरुआत आसान: 50 जार्स घर पर बनाए, WhatsApp पर फ़्रेंड्स और फ़ैमिली को बेचे। राय ज़बरदस्त। लोग और चाहते थे। गिफ़्ट करना चाहते थे। Delhi, Mumbai, Bangalore भिजवाना चाहते थे।

तब अंकिता को रियलाइज़ हुआ: बढ़िया अचार बनाना एक हुनर है। उसे पैकेज्ड फ़ूड उत्पाद के रूप में बेचना एक पूरा अलग बिज़नेस है।

अंकिता को क्या-क्या फ़िगर आउट करना पड़ा

1. FSSAI कम्प्लायंस शुरू में बुनियादी FSSAI लाइसेंस लिया (टर्नओवर ₹12 लाख से कम)। जब क्रॉस किया, स्टेट लाइसेंस में अपग्रेड किया। प्रक्रिया 3 हफ़्ते लगा, प्रोडक्शन स्पेस का इंस्पेक्शन हुआ।

2. लेबलिंग रिक्वायरमेंट्स India में हर पैकेज्ड फ़ूड उत्पाद पर ये होना ज़रूरी है:

  • उत्पाद नेम
  • इंग्रीडिएंट्स लिस्ट (क्वांटिटी के हिसाब से डिसेंडिंग ऑर्डर)
  • नेट क्वांटिटी/वेट
  • FSSAI लाइसेंस नंबर और लोगो
  • मैन्युफ़ैक्चरर नेम और एड्रेस
  • डेट ऑफ़ मैन्युफ़ैक्चर
  • बेस्ट बिफ़ोर / एक्सपायरी डेट
  • न्यूट्रिशनल इन्फ़ॉर्मेशन (पर 100g/100ml)
  • वेज/नॉन-वेज सिंबल
  • MRP (सब टैक्सेज़ मिलाकर)
  • बैच/लॉट नंबर
  • स्टोरेज इंस्ट्रक्शन्स
  • एलर्जन डिक्लेरेशन (अगर एप्लिकेबल)

एक भी चीज़ मिस हुई — उत्पाद शेल्व्स से या ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म्स से हट सकता है।

3. शेल्फ़ लाइफ़ टेस्टिंग अचार कितने दिन चलेगा? किन स्टोरेज कंडीशन्स में? अंकिता ने NABL-एक्रेडिटेड लैब में टेस्ट करवाया। ₹3,000-5,000 पर उत्पाद वैरिएंट। लैब रिपोर्ट बताती है असली शेल्फ़ लाइफ़ — "6 महीने" गेस करके प्रिंट नहीं कर सकते।

4. पैकेजिंग शुरू में ग्लास जार्स — ख़ूबसूरत लगते थे लेकिन शिपिंग में टूटते थे। PET जार्स में स्विच किया — फ़ूड-ग्रेड, लीक-प्रूफ़, हल्के, शिपिंग सस्ती। कस्टम लेबल्स ₹5,000 में डिज़ाइन करवाए, 2,000 लेबल्स ₹4,000 में प्रिंट हुए।

5. मूल्य निर्धारण लागत पर जार: ₹85 (इंग्रीडिएंट्स ₹40, जार + कैप ₹18, लेबल ₹3, लेबर ₹15, शिपिंग पैकेजिंग ₹9) रिटेल दाम: ₹249 Amazon पर — कमीशन (25-30%) + शिपिंग के बाद: नेट ₹155 मार्जिन पर जार: Amazon पर ₹70, सीधा ऑर्डर्स पर ₹164

इसीलिए अंकिता वेबसाइट और Instagram से सीधा ऑर्डर्स पुश करती है।


फ़ूड की मूल्य निर्धारण: पर्सीव्ड वैल्यू बहुत मायने रखती है

फ़ूड उन फ़्यू श्रेणियाँ में से है जहाँ पर्सीव्ड वैल्यू असली लागत से बहुत ज़्यादा — या बहुत कम — हो सकती है।

दाल-चावल बनाने में लगभग उतना ही लगता है चाहे रोडसाइड ढाबे में सर्व करो या बुटीक रेस्टोरेंट में। ढाबा ₹50 लेता है, रेस्टोरेंट ₹350। फ़र्क़ खाने में नहीं — अनुभव, एम्बिएंस, प्लेटिंग, और ब्रांड में है।

फ़ूड मूल्य निर्धारण के प्रिंसिपल्स

1. दाम ग्राहक की उम्मीदेशन से एंकर करो, सिर्फ लागत से नहीं। देहरादून में अगर टारगेट ग्राहक सोचता है कि अच्छी बिरयानी ₹250-350 में आनी चाहिए — उसी रेंज में दाम करो। लागतें फ़िट नहीं कर रहीं — लागतें कम करो, मार्केट से बाहर दाम मत करो।

2. राउंड नंबर्स महँगा लगते हैं। जस्ट-बिलो नंबर्स डील लगते हैं। ₹300 ज़्यादा लगता है ₹299 से। ₹250 ज़्यादा लगता है ₹249 से। ये ट्रिक नहीं — ह्यूमन साइकोलॉजी है। इस्तेमाल करो।

3. कॉम्बोज़ टिकट साइज़ बढ़ाते हैं, पर्सीव्ड दाम कम करते हैं। "बिरयानी + रायता + गुलाब जामुन: ₹399" (इंडिविजुअल कुल ₹417)। ग्राहक को डील मिली। तुमने एक की जगह तीन आइटम्स बेचे, और कॉम्बो की फ़ूड लागत बेहतर है क्योंकि रायता और डेज़र्ट हाई-मार्जिन हैं।

4. मेन्यू पर ₹ साइन मत रखो। रिसर्च बताती है — बिना करेंसी सिंबल वाले मेन्इस्तेमाल पर लोग ज़्यादा ख़र्च करते हैं। "चिकन बिरयानी ... 299" लगता है कम "स्पेंडिंग" — "चिकन बिरयानी ... ₹299" से। छोटी डीटेल, रियल असर।

5. फ़ोटोग्राफ़ी ऑर्डर्स 30%+ बढ़ाती है। पेशेवर फ़ूड फ़ोटोग्राफ़ी में निवेश करो — मेन्यू, Swiggy लिस्टिंग, Instagram के लिए। अच्छी फ़ोटोज़ खाना बेचती हैं। बुरी फ़ोटोज़ भूख मारती हैं। ये विकल्पल नहीं है।


स्टाफ़ प्रबंधन — फ़ूड उद्योग में

फ़ूड हाई-टर्नओवर उद्योग है। India में रेस्टोरेंट्स का एनुअल स्टाफ़ टर्नओवर 80-100% है। 5 एम्प्लॉइज़ हैं तो उम्मीद रखो 4-5 साल भर में चले जाएँगे।

टर्नओवर इतना हाई क्यों

  • लंबे आवर्स (10-14 घंटे डेली, वीकेंड्स और हॉलिडेज़ इंक्लूडेड)
  • कम बेस पे (टियर-2 सिटीज़ में किचन स्टाफ़ को ₹10,000-18,000)
  • शारीरिक रूप से माँगिंग (गर्मी, खड़े रहना, रिपिटिटिव काम)
  • करियर प्रोग्रेशन दिखता नहीं
  • बेहतर विकल्प (आइरॉनिकली, Swiggy के लिए डिलीवरी करना Swiggy के लिए कुक करने से ज़्यादा पे करता है)

कैसे सँभालें

1. मार्केट रेट से ऊपर पे करो। देहरादून में कुक को ₹14,000 मिलता है, तो ₹16,000 दो। ₹2,000 एक्स्ट्रा = ₹24,000/ईयर। रिप्लेसमेंट ढूँढने-ट्रेन करने में ₹30,000-50,000 लगता है। सस्ता पड़ता है।

2. इंसान की तरह ट्रीट करो। शिफ़्ट में दो मील्स दो (स्टैंडर्ड है)। हफ़्ते में एक छुट्टी। चिल्लाओ मत। इंसल्ट मत करो। ये बुनियादी लगता है — India की ज़्यादातर किचन्स में वॉक करो, समझ आ जाएगा स्टाफ़ क्यों भागते हैं।

3. क्रॉस-ट्रेन करो। हर कुक को कम से कम दो स्टेशन्स आने चाहिए। एक एब्सेंट हो तो किचन चले। एक "मास्टर शेफ़" पर निर्भर मत रहो जो तुम्हें होचरण बना ले।

4. सब कुछ डॉक्यूमेंट करो। रेसिपीज़ एग्ज़ैक्ट मेज़रमेंट्स के साथ लिखी हों। तुम्हारा बिज़नेस चलने में सक्षम हो चाहे बेस्ट कुक कल चला जाए। अगर नहीं चल सकता — तो पीपल-निर्भरेंसी समस्या है, बिज़नेस नहीं।

5. मुनाफ़ा-शेयरिंग या इंसेंटिव्स। मंथली राजस्व ₹X क्रॉस करे तो हर स्टाफ़ मेंबर को ₹Y बोनस। एलाइंड इंसेंटिव्स टर्नओवर कम करते हैं, एफ़र्ट बढ़ाते हैं।


फ़ूड बिज़नेस की आम ग़लतियाँ

उत्तराखंड में दर्जनों फ़ूड एंट्रप्रेन्योर्स से बात करने के बाद — ये पैटर्न्स नाकाम्योर कॉज़ करते हैं:

ग़लती 1: "मेरा खाना अमेज़िंग है, बिज़नेस चल जाएगा"

बढ़िया खाना ज़रूरी है लेकिन काफ़ी नहीं। जगह (या ऑनलाइन प्रेज़ेंस), मूल्य निर्धारण, मार्केटिंग, स्टाफ़ प्रबंधन, फ़ाइनेंशियल डिसिप्लिन, कम्प्लायंस — सब चाहिए। बंद हुए रेस्टोरेंट्स का ग्रेवयार्ड बढ़िया कुक्स से भरा है जो बुरे बिज़नेसपीपल थे।

ग़लती 2: बहुत बड़ा शुरू करना

2,000 sq ft रेस्टोरेंट, 60 सीट्स, डिज़ाइनर इंटीरियर्स, 40-आइटम मेन्यू — जबकि कभी फ़ूड बिज़नेस चलाया ही नहीं। स्मॉल शुरू करो। क्लाउड किचन, स्टॉल, टिफ़िन सेवा से टेस्ट करो। माँग प्रूव होने दो, फिर बड़ा निवेश करो।

ग़लती 3: फ़ूड लागत गणना इग्नोर करना

"मैं अंदाज़े से डाल देता हूँ।" एक्स्ट्रा पनीर की वो कैज़ुअल मुट्ठी, जेनरस पोर्शन्स — सब ऐड अप होता है। अगर एग्ज़ैक्ट फ़ूड लागत पर डिश नहीं पता — तो ये नहीं पता कि कमा रहे हो या गँवा रहे हो।

ग़लती 4: डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म्स पर ज़रूरत से ज़्यादा निर्भरता

90% राजस्व Swiggy/Zomato पर बिल्ड करना = किराए की ज़मीन पर घर बनाना। एक पॉलिसी बदलाव, एल्गोरिदम ट्वीक, लिस्टिंग सस्पेंड — और बिज़नेस रातों-रात कोलैप्स। पैरेलल चैनल्स बनाओ: डाइन-इन, सीधा डिलीवरी, WhatsApp ऑर्डर्स, कैटरिंग।

ग़लती 5: डेली नंबर्स ट्रैक नहीं करना

सफल फ़ूड बिज़नेस ओनर्स ये नंबर्स हर दिन चेक करते हैं:

  • कुल राजस्व (डाइन-इन + डिलीवरी + सीधा)
  • ऑर्डर्स की संख्या
  • एवरेज ऑर्डर वैल्यू
  • दिन की फ़ूड लागत (परचेसेज़)
  • स्टाफ़ अटेंडेंस
  • ग्राहक कम्प्लेंट्स/रिटर्न्स

मंथली देखोगे तो समस्याएँ 30 दिन देर से पता चलेंगी।

ग़लती 6: ट्रेंड्स ब्लाइंडली कॉपी करना

"क्लाउड किचन चल रहा है, तो मैं भी खोलूँगा।" हर मॉडल किसी के लिए काम करता है, किसी के लिए नाकाम। समझो क्यों काम कर रहा है, तुम्हारे लिए वो कंडीशन्स हैं या नहीं, और तुम्हारे पास वो हुनर और टेम्प्रामेंट है या नहीं।

ग़लती 7: FSSAI और हाइजीन छोड़ना

कुछ लोग सोचते हैं "चलता है, छोटा बिज़नेस है" — लाइसेंसिंग छोड़ना। जब तक फ़ूड सेफ़्टी इंस्पेक्टर आए, या ग्राहक कम्प्लेंट करे, या ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म ख़ारिज करे। कम्प्लायंस विकल्पल नहीं है। फ़ाउंडेशन है।


असली सवाल

विक्रम रात 11:30 बजे क्लोज़िंग के बाद बैठता है। किचन फ़ाइनली शांत है। वो अपनी नोटबुक खोलता है — POS सिस्टम से पहले से पुरानी आदत — और आज के नंबर्स लिखता है।

राजस्व: ₹22,400 (अच्छा Friday)। फ़ूड लागत एस्टिमेट: करीब ₹7,000। आज का Swiggy कमीशन: लगभग ₹2,800। स्टाफ़ लागत: रफ़ली ₹2,300। रेंट पर डे: ₹1,333। इलेक्ट्रिसिटी + गैस: करीब ₹800। पैकेजिंग: ₹600। फ़्रेंचाइज़ी रॉयल्टी: ₹1,792। अदर: ₹500।

आज का मुनाफ़ा: रफ़ली ₹5,275।

अच्छे Friday पर। Tuesday? शायद ₹800। बारिश वाला Monday? शायद नेगेटिव।

"फ़ूड बिज़नेस एक Friday नाइट के बारे में नहीं है," विक्रम ख़ुद से कहता है। "30 दिनों का एवरेज है। 365 दिनों का सस्टेंड है। और साल के अंत में, क्या मैंने कुछ ऐसा बनाया जो रखने लायक है?"

वो Swiggy रेटिंग देखता है: 4.3 स्टार्स। गौरव की क्लाउड किचन के बारे में सोचता है — लीनर, ज़्यादा फ़ायदेमंद। अंकिता के पैकेज्ड फ़ूड के बारे में सोचता है — स्केलेबल, 14 घंटे किचन में बंधा नहीं।

कोई एक "सही" फ़ूड बिज़नेस नहीं है। लेकिन सही तरीक़ा है चलाने का: साफ़ नंबर्स, कंट्रोल्ड लागतें, अच्छे लोग, लीगल कम्प्लायंस, और ये समझ कि ये उद्योग डिसिप्लिन इनाम करती है, सिर्फ़ पैशन नहीं।

पैशन किचन खुलवाता है। डिसिप्लिन खुला रखता है।


चैप्टर चेकलिस्ट

फ़ूड बिज़नेस शुरू करने से पहले — ये सवालों के जवाब दे सको:

  • कौन सा फ़ूड बिज़नेस टाइप मेरी कैपिटल, हुनर, और लाइफ़स्टाइल से मैच करता है?
  • हर मेन्यू आइटम की फ़ूड लागत पर्सेंटेज क्या है?
  • मेन्यू आइटम्स वर्गीकृत किए — स्टार्स, वर्कहॉर्सेज़, पज़ल्स, डॉग्स?
  • वेस्ट रिडक्शन के सिस्टम्स हैं (FIFO, पोर्शन कंट्रोल, प्रेप योजना)?
  • मेरे स्केल के लिए सही FSSAI लाइसेंस है?
  • हाइजीन और फ़ूड सेफ़्टी अभ्यासेज़ डॉक्यूमेंटेड और एन्फ़ोर्स्ड हैं?
  • डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म्स vs सीधा ऑर्डर्स — स्ट्रैटेजी साफ़ है?
  • फ़ुल यूनिट इकोनॉमिक्स गणना किया है (सिर्फ फ़ूड लागत नहीं, ALL लागतें)?
  • डेली ट्रैकिंग सिस्टम है की नंबर्स के लिए?
  • कोई एक पर्सन एब्सेंट हो तो भी किचन चल सकती है?

फ़ूड उद्योग में एंट्री बैरियर सबसे कम है और नाकाम्योर रेट सबसे ज़्यादा। जो बिज़नेसेज़ बचते हैं — उनके पास बेस्ट रेसिपीज़ नहीं, बेस्ट सिस्टम्स होते हैं।