बिज़नेस के लिए फ़ंडिंग
"पैसे कहाँ से आए?"
संडे की दोपहर है। ऋषिकेश में पुष्पा दीदी की चाय की दुकान पर सात लोग बैठे हैं। दुकान आज बंद है — संडे को वो "अपने लोगों" के लिए खोलती हैं। भंडारी अंकल हल्द्वानी से आए हैं। रावत जी रानीखेत से मेडिकल चेक-अप के लिए उतरे हैं। नीमा और ज्योति मुनस्यारी वापस जाते हुए रुकी हैं। विक्रम देहरादून से बाइक पर आया है। अंकिता इसलिए है क्योंकि पुष्पा दीदी की अदरक वाली चाय पूरे स्टेट में सबसे अच्छी है — इस पर बहस करने का कोई पॉइंट नहीं।
पुष्पा दीदी तीसरा राउंड चाय डालती हैं और वो सवाल पूछती हैं जिसने बात शुरू की:
"सबको पता है कि बिज़नेस शुरू करना है। लेकिन बताओ — पैसे कहाँ से आए? लाइक, रियली। पैसा कहाँ से आया?"
एक सेकंड के लिए सन्नाटा। फिर सब एक साथ बोलने लगे।
ये इस किताब का सबसे व्यावहारिक चैप्टर है। आइडियाज़ फ़्री हैं। एक्ज़ीक्यूशन में पैसा लगता है। और बिज़नेस न शुरू होने — या शुरू होकर एक साल में बंद हो जाने — की सबसे बड़ी वजह ये है कि फ़ाउंडर के पास या तो पैसा कम था, या ग़लत तरीक़े का पैसा था, या उसे पता ही नहीं था कि उस पैसे की असली क़ीमत क्या है।
हम हर यथार्थवादी फ़ंडिंग विकल्प कवर करेंगे जो इंडिया में — ख़ासकर उत्तराखंड में — बिज़नेस शुरू करने या बढ़ाने वाले किसी भी इंसान के लिए अवेलेबल है। सिर्फ़ स्कीम नेम्स की लिस्ट नहीं। असली चरण। क्या काम करता है, क्या नहीं, और हमारे कैरेक्टर्स ने ऐक्चुअली क्या किया।
1. बूटस्ट्रैपिंग — अपने पैसे से शुरुआत
पुष्पा दीदी पहले बोलती हैं। "मैं बताती हूँ। जब मैंने छह साल पहले ये चाय की दुकान शुरू की, मेरे सेविंग्स अकाउंट में ₹47,000 थे। बस। ₹47,000।"
उँगलियों पर गिनती हैं: "₹8,000 पहले महीने की रेंट। ₹5,000 सिक्योरिटी डिपॉज़िट। ₹12,000 चूल्हा, गैस सिलिंडर, बर्तन, कप्स, एक बुनियादी टेबल-बेंच। ₹6,000 पहले स्टॉक का — चाय पत्ती, दूध, चीनी, अदरक, इलायची। ₹4,000 साइनबोर्ड का। और ₹12,000 इमरजेंसी के लिए साइड में रखे।"
"कोई लोन नहीं। कोई स्कीम नहीं। बस अपना पैसा — तीन साल होटल की किचन में काम करके जमा किया था।"
इसे बूटस्ट्रैपिंग बोलते हैं — अपनी सेविंग्स से बिज़नेस शुरू करना। कोई क़र्ज़ नहीं, कोई निवेशक नहीं, कोई पेचीदा पेपरवर्क नहीं। सिर्फ़ आपका पैसा, आपका जोखिम।
बूटस्ट्रैपिंग क्यों काम करता है:
- बिज़नेस का 100% आपका है। कोई बोलने वाला नहीं।
- EMI का प्रेशर नहीं। एक महीना सेल्स कम हुई, तो बेल्ट टाइट करो — लोन डिफ़ॉल्ट नहीं होगा।
- छोटे से शुरू करो, बढ़ो तभी जब अफ़ोर्ड कर सको। ये डिसिप्लिन फ़ोर्स करता है।
- हर रुपया आपका है, तो वेस्ट नहीं करोगे।
बूटस्ट्रैपिंग की लिमिट्स:
- एक सीलिंग है। ₹47,000 से रेस्टोरेंट नहीं खुलता।
- बढ़त स्लो होती है। मुनाफ़े रीनिवेश करो, तो मुनाफ़े की स्पीड से ही बढ़ोगे।
- एक ख़राब महीना पूरा रिज़र्व ख़त्म कर सकता है।
भंडारी अंकल सिर हिलाते हैं। "मैंने भी अपने पैसे से शुरू किया — वेल, सॉर्ट ऑफ़। ₹80,000 अपनी सेविंग्स से और ₹1,50,000 बड़े भाई ने दिए। बिना इंटरेस्ट। दो साल में वापस किए।"
फ़ैमिली और फ़्रेंड्स से उधार लेना इंडिया में अर्ली फ़ंडिंग का सबसे आम तरीक़ा है। काम करता है, लेकिन इनविज़िबल लागतें हैं — उम्मीदें, गिल्ट, रिश्ते पर जोखिम।
अगर फ़ैमिली से पैसे लो:
- लिखकर रखो। भाई से भी लो तो। एक सिंपल लिखा हुआ नोट — कितना, कब वापस, कोई इंटरेस्ट — दोनों साइड्स को बचाता है।
- यथार्थवादी रीपेमेंट टाइमलाइन बनाओ। "3 महीने" का वादा मत करो अगर 12 लगेंगे।
- अपडेट देते रहो। महीने में एक मेसेज — "बिज़नेस ठीक चल रहा है, मार्च से वापस करना शुरू करूँगा" — बहुत मायने रखता है।
- समझो कि इस पैसे के साथ इमोशनल स्ट्रिंग्स आती हैं। बिज़नेस नाकाम हुआ तो रिश्ता सफ़र कर सकती है। उतना ही लो जितना लूज़ करने की कैपेसिटी हो।
2. बैंक लोन्स
विक्रम आगे झुकता है। "मैं तो सीधा बैंक गया। फ़्रेंचाइज़ी के लिए ₹18 लाख चाहिए थे। ₹6 लाख सेव्ड थे। पेरेंट्स ने ₹4 लाख दिए। ₹10 हो गए। बाक़ी ₹8 लाख के लिए MUDRA लोन लिया।"
नीमा सरप्राइज़ होती है। "MUDRA लोन? नाम सुना है, लेकिन मुझे लगा वो सिर्फ़ बहुत छोटे बिज़नेसेज़ के लिए है?"
"है तो छोटे के लिए," विक्रम बोलता है। "लेकिन 'छोटा' रिलेटिव है। ₹10 लाख तक मिलता है।"
MUDRA लोन्स — प्रधानमंत्री मुद्रा योजना
MUDRA इंडिया में स्मॉल बिज़नेसेज़ के लिए सबसे एक्सेसिबल लोन प्रोग्राम है। बैंक्स, NBFCs, और MFIs के थ्रू मिलता है। कोई अलग एप्लिकेशन नहीं — अपने नियमित बैंक में जाओ और MUDRA लोन माँगो।
तीन श्रेणियाँ:
| श्रेणी | लोन अमाउंट | किसके लिए |
|---|---|---|
| शिशु | ₹50,000 तक | बहुत छोटे / शुरू होने वाले बिज़नेस |
| किशोर | ₹50,001 से ₹5,00,000 | बिज़नेस एक्सपैंड करने वाले |
| तरुण | ₹5,00,001 से ₹10,00,000 | एस्टैब्लिश्ड स्मॉल बिज़नेसेज़ |
ज़रूरी बातें:
- कोई कोलैटरल नहीं चाहिए (MUDRA में ₹10 लाख तक के लोन्स के लिए)
- इंटरेस्ट रेट्स: आमतौर पर 8-12% पर ईयर, बैंक पर निर्भर करता है
- रीपेमेंट पीरियड: इस्तेमालुअली 3-5 साल
- सब पब्लिक सेक्टर बैंक्स, ज़्यादातर प्राइवेट बैंक्स, और बहुत से NBFCs में अवेलेबल
- प्रक्रियािंग फ़ी: लोन अमाउंट का 0.5% से 1%
लागू करने के लिए क्या चाहिए:
- आइडेंटिटी प्रूफ़ (Aadhaar, PAN)
- एड्रेस प्रूफ़
- बिज़नेस प्रूफ़ — उद्यम रजिस्ट्रेशन, GST सर्टिफ़िकेट, या ट्रेड लाइसेंस — कुछ भी चलेगा
- बैंक स्टेटमेंट्स (लास्ट 6 मंथ्स)
- एक सिंपल प्रोजेक्ट रिपोर्ट या बिज़नेस प्लान (बैंक भी बनवाने में मदद करता है)
- दो पासपोर्ट साइज़ फ़ोटोज़
बैंक क्या देखता है:
- बिज़नेस रियल है? कोई ट्रैक रिकॉर्ड है?
- रीपे कर पाओगे? कैश फ़्लो देखेगा — आमदनी vs ख़र्चे।
- CIBIL स्कोर — ये आपकी क्रेडिट हिस्ट्री का स्कोर है। 700 से ऊपर अच्छा। 750 से ऊपर एक्सीलेंट। 650 से नीचे लोन मिलना बहुत मुश्किल।
- अगर कभी लोन या क्रेडिट कार्ड नहीं लिया, तो CIBIL स्कोर नहीं होगा। ये अपने-आप समस्या नहीं है — कुछ बैंक्स में फ़र्स्ट-टाइम बॉरोअर्स के लिए ऑल्टरनेट स्कोरिंग होती है।
विक्रम की टिप: "मैं पहले SBI गया। ख़ारिज हो गया। कोई वजह नहीं बताया — बस 'नॉट अप्रूव्ड'। फिर बैंक ऑफ़ बड़ौदा गया। सेम डॉक्यूमेंट्स। 14 दिन में अप्रूव हो गया। एक रिजेक्शन के बाद हार मत मानो। अलग-अलग बैंक्स की अलग-अलग ऐपेटाइट होती है।"
MSME लोन्स
अगर आपका बिज़नेस उद्यम रजिस्ट्रेशन के तहत MSME (Micro, Small, Medium Enterprise) रजिस्टर्ड है (फ़्री, ऑनलाइन, 10 मिनट लगते हैं — udyamregistration.gov.in पर), तो लोन उत्पाद का पूरा रेंज खुल जाता है।
फ़ायदे:
- लोअर इंटरेस्ट रेट्स (आम तौर पर नियमित बिज़नेस लोन्स से 1-2% कम)
- प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग — बैंक्स को MSMEs को एक पर्सेंटेज तक लेंड करना ज़रूरी है
- फ़ास्टर प्रक्रियािंग
- कुछ श्रेणियाँ में इंटरेस्ट पर गवर्नमेंट सब्सिडी
CGTMSE (Credit Guarantee Fund Trust for MSMEs): ये गवर्नमेंट गारंटी स्कीम है। MSME बॉरोअर को अगर बैंक CGTMSE के तहत लोन दे, तो ₹5 करोड़ तक कोलैटरल नहीं देना पड़ता। गवर्नमेंट बैंक को लोन गारंटी करती है।
ये बड़ी बात है। ज़्यादातर स्मॉल बिज़नेस ओनर्स की सबसे बड़ी समस्या: "बैंक संपत्ति कोलैटरल माँग रहा है, और मेरे पास संपत्ति नहीं है।" CGTMSE इसे हल करता है।
टर्म लोन vs वर्किंग कैपिटल लोन
दो तरह के बैंक लोन्स सुनोगे। दोनों अलग समस्याएँ हल करते हैं।
टर्म लोन:
- एक ख़ास पर्पस के लिए वन-टाइम लम्प सम — इक्विपमेंट ख़रीदना, शॉप सेट अप करना, व्हीकल लेना
- फ़िक्स्ड रीपेमेंट शेड्यूल — मंथली EMIs, 3-7 साल
- इंटरेस्ट पूरी अमाउंट पर गणना होता है
- उदाहरण: विक्रम का ₹8 लाख लोन — फ़्रेंचाइज़ी सेट अप के लिए
वर्किंग कैपिटल लोन:
- डेली बिज़नेस ख़र्चे मैनेज करने के लिए ऑनगोइंग क्रेडिट — भंडार ख़रीदना, आपूर्तिकर्ता को पे करना, ग्राहक पेमेंट्स आने तक तनख़्वाह कवर करना
- इस्तेमालुअली ओवरड्राफ़्ट (OD) या कैश क्रेडिट (CC) फ़ैसिलिटी के फ़ॉर्म में
- जितना इस्तेमाल करो, उतने पर इंटरेस्ट — बाक़ी पर नहीं
- हर साल रिन्यू होता है
- उदाहरण: भंडारी अंकल का PNB में ₹3 लाख CC लिमिट
भंडारी अंकल समझाते हैं: "मेरा PNB में CC अकाउंट है। ₹3 लाख लिमिट। कंस्ट्रक्शन सीज़न शुरू होने से पहले मार्च में ₹2 लाख ड्रॉ करता हूँ, बल्क में सीमेंट, पाइप्स, वायरिंग ख़रीदता हूँ — अच्छे रेट पर। सेल्स होती हैं, पैसा वापस आता है। जून तक CC इस्तेमालुअली ज़ीरो हो जाता है। इंटरेस्ट सिर्फ़ उन 3-4 मंथ्स का भरता हूँ जितने में ऐक्चुअली पैसा इस्तेमाल किया।"
कौन सा चाहिए?
- बिज़नेस शुरू करना है या बड़ी ख़रीदारी करनी है → टर्म लोन
- बिज़नेस चल रहा है, कैश फ़्लो सँभालना है → वर्किंग कैपिटल
कोलैटरल और गारंटीज़
सबसे बड़ी दीवार: बैंक सिक्योरिटी चाहता है।
कोलैटरल — संपत्ति, FD, गोल्ड, या कोई ऐसेट जो लोन के अगेंस्ट प्लेज करते हो। रीपे नहीं कर पाए तो बैंक ज़ब्त कर सकता है।
पर्सनल गारंटी — तुम साइन करते हो कि बिज़नेस रीपे नहीं कर पाया तो पर्सनली तुम करोगे। तुम्हारी पर्सनल ऐसेट्स जोखिम पर हैं।
थर्ड-पार्टी गारंटी — कोई और (अक्सर फ़ैमिली मेंबर) गारंटर बनता है। उनकी ऐसेट्स लाएबल हो जाती हैं अगर डिफ़ॉल्ट हो।
छोटे लोन्स (MUDRA में ₹10 लाख तक, CGTMSE में ₹5 करोड़ तक) में कोलैटरल टालना हो सकता है। बड़े लोन्स में ऑलमोस्ट सर्टेनली देना पड़ेगा।
वॉर्निंग: कभी भी अपना फ़ैमिली होम बिज़नेस लोन के लिए प्लेज मत करो — जब तक रीपेमेंट बिल्कुल सर्टेन न हो। "बिल्कुल सर्टेन" का मतलब — एग्ज़िस्टिंग, रिलाएबल राजस्व है, सिर्फ़ उम्मीद नहीं। बिज़नेसेज़ नाकाम होते हैं। बिज़नेस दोबारा शुरू कर सकते हो। घर खोना — वो एक अलग तरह का घाटा है।
3. गवर्नमेंट स्कीम्स
गवर्नमेंट स्कीम्स रियल हैं। काम करती हैं। लेकिन "स्कीम एग्ज़िस्ट्स" और "पैसा अकाउंट में" के बीच पेपरवर्क, बैंक विज़िट्स, और पेशेंस लगती है। सबसे रेलेवेंट स्कीम्स कवर करते हैं — और ऐक्चुअली लागू कैसे करें।
PM SVANidhi — स्ट्रीट वेंडर स्कीम
पुष्पा दीदी हाथ उठाती हैं। "ये मैंने लिया! COVID में सब बंद हो गया। जब रीओपन किया, तो फ़्रेश स्टॉक के लिए पैसे चाहिए थे। एक ग्राहक ने PM SVANidhi बताया। ₹10,000 लोन मिल गया।"
ये क्या है: स्ट्रीट वेंडर्स के लिए माइक्रो-क्रेडिट।
ब्योरा:
- पहला लोन: ₹10,000 तक
- दूसरा लोन (टाइम पर रीपे किया तो): ₹20,000 तक
- तीसरा लोन: ₹50,000 तक
- इंटरेस्ट सब्सिडी: टाइम पर रीपे करने पर 7%
- कोई कोलैटरल नहीं
कौन एलिजिबल है:
- स्ट्रीट वेंडर्स जिनके पास वेंडिंग सर्टिफ़िकेट या टाउन वेंडिंग कमिटी / ULB की रिकमेंडेशन लेटर हो
- 24 मार्च 2020 से पहले या उस दिन वेंडिंग कर रहे हों
कैसे लागू करें:
- pmsvanidhi.mohua.gov.in पर जाओ
- मोबाइल नंबर और Aadhaar से रजिस्टर करो
- वेंडिंग सर्टिफ़िकेट या रिकमेंडेशन लेटर अपलोड करो
- एप्लिकेशन नियरेस्ट बैंक ब्रांच को जाती है
- बैंक वेरिफ़ाई करके 30 दिन में डिस्बर्स करता है (इस्तेमालुअली)
स्टैंड अप इंडिया
ये क्या है: SC/ST और विमेन एंटरप्रेन्योर्स के लिए ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक लोन्स।
ये ताक़तवर स्कीम है और अंडर-यूटिलाइज़्ड है। हर बैंक ब्रांच को मैंडेट है कि कम से कम एक SC/ST बॉरोअर और एक वुमन बॉरोअर को इस स्कीम में लोन दे।
ब्योरा:
- लोन अमाउंट: ₹10 लाख से ₹1 करोड़
- नया एंटरप्राइज़ सेट अप करने के लिए (मैन्युफ़ैक्चरिंग, सेवाएँ, या ट्रेडिंग)
- एंटरप्राइज़ नया (ग्रीनफ़ील्ड) होना चाहिए — एग्ज़िस्टिंग बिज़नेसेज़ के लिए नहीं
- रीपेमेंट: 7 साल तक, 18 मंथ्स तक मोरेटोरियम पीरियड
- कम्पोज़िट लोन — टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल दोनों कवर करता है
- कोलैटरल: जहाँ मुमकिन हो सिक्योर करें, लेकिन CGTMSE कवर अवेलेबल
कौन एलिजिबल है:
- SC/ST एंटरप्रेन्योर्स, या
- विमेन एंटरप्रेन्योर्स (कोई भी श्रेणी)
- 18+ साल उम्र
- पहले कोई बैंक लोन डिफ़ॉल्ट नहीं किया हो
- साझेदारी में SC/ST या वुमन एप्लिकेंट का 51% या ज़्यादा शेयरहोल्डिंग ज़रूरी
कैसे लागू करें:
- standupmitra.in पर जाओ
- रजिस्टर करो, ऑनलाइन फ़ॉर्म भरो
- नियरेस्ट बैंक ब्रांच से कनेक्ट होंगे
- तैयार रखो: Aadhaar, PAN, कास्ट सर्टिफ़िकेट (SC/ST हो तो), बिज़नेस प्लान, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, मशीनरी/इक्विपमेंट की कोटेशन्स
- बैंक ब्रांच में पर्सनली फ़ॉलो-अप करो। गंभीरली — बस ऑनलाइन सबमिट करके मत बैठो।
नीमा बोलती है: "ज्योति और मैं विमेन हैं। जब होमस्टे शुरू किया तब हमें इसका पता ही नहीं था। पता होता तो ₹15-20 लाख का लोन ले सकती थीं — बजाय ₹8 लाख सेविंग्स और फ़ैमिली से इकट्ठा करने के।"
PMEGP — प्राइम मिनिस्टर्स एम्प्लॉयमेंट जेनरेशन प्रोग्राम
ये क्या है: क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी स्कीम। बैंक लोन लो, और गवर्नमेंट उसके एक हिस्से पर सब्सिडी देती है — जो वापस नहीं करनी।
ये ज़रूरीी फ़्री मनी है लोन के ऊपर। ध्यान से पढ़ो।
ब्योरा:
- नए एंटरप्राइज़ सेट अप करने के लिए — मैन्युफ़ैक्चरिंग (₹50 लाख तक) या सेवाएँ/ट्रेडिंग (₹20 लाख तक)
- सब्सिडी: प्रोजेक्ट लागत का 15-35% (श्रेणी और जगह पर निर्भर)
| श्रेणी | अर्बन इलाक़ाज़ | रूरल इलाक़ाज़ |
|---|---|---|
| जनरल | 15% सब्सिडी | 25% सब्सिडी |
| SC/ST/OBC/विमेन/माइनॉरिटीज़/एक्स-सेवामेन/PwD/NER/हिल स्टेट्स | 25% सब्सिडी | 35% सब्सिडी |
उत्तराखंड फ़ायदा: उत्तराखंड का ज़्यादातर हिस्सा "हिल स्टेट" इलाक़ा क्वालिफ़ाई करता है। मतलब रूरल उत्तराखंड के जनरल श्रेणी एप्लिकेंट्स भी 25% सब्सिडी पा सकते हैं। और SC/ST/विमेन — रूरल उत्तराखंड — 35%।
रावत जी का उदाहरण:
- एप्पल जूस प्रक्रियािंग यूनिट लगाना है। कुल प्रोजेक्ट लागत: ₹15 लाख।
- रानीखेत में हैं — रूरल हिल इलाक़ा।
- जनरल श्रेणी हैं।
- सब्सिडी: ₹15 लाख का 25% = ₹3,75,000
- ख़ुद का कॉन्ट्रिब्यूशन: 10% = ₹1,50,000
- बैंक लोन: ₹15,00,000 - ₹3,75,000 - ₹1,50,000 = ₹9,75,000
- मतलब ₹1.5 लाख ख़ुद का, ₹9.75 लाख बैंक लोन, और ₹3.75 लाख ग्रांट। रीपे सिर्फ़ बैंक लोन करना है।
कौन एलिजिबल है:
- 18 साल से ऊपर कोई भी इंडिविजुअल
- मैन्युफ़ैक्चरिंग में ₹10 लाख से ऊपर और सेवाएँ में ₹5 लाख से ऊपर प्रोजेक्ट्स: 8वीं पास ज़रूरी
- पहले से चल रहे यूनिट्स या दूसरी गवर्नमेंट सब्सिडी ले रहे यूनिट्स एलिजिबल नहीं
- नया यूनिट होना चाहिए
कैसे लागू करें:
- kviconline.gov.in पर जाओ
- ऑनलाइन लागू करो — Aadhaar, प्रोजेक्ट ब्योरा, एजुकेशन सर्टिफ़िकेट
- एप्लिकेशन्स डिस्ट्रिक्ट उद्योग सेंटर (DIC) या KVIC/KVIB स्क्रीन करते हैं
- सेलेक्ट होने पर बैंक के लिए रिकमेंडेशन लेटर मिलती है
- बैंक लोन प्रक्रिया करता है
- सब्सिडी बैंक अकाउंट में टर्म डिपॉज़िट में पार्क होती है — बिज़नेस चलने के बाद रिलीज़ होती है
- टाइमलाइन: एप्लिकेशन से डिस्बर्समेंट तक 2-6 महीने (डिलेज़ के लिए तैयार रहो)
उत्तराखंड स्टेट स्कीम्स
मुख्यमंत्री स्वरोज़गार योजना (MMSY):
- मैन्युफ़ैक्चरिंग और सेवा सेक्टर बिज़नेसेज़ के लिए ₹25 लाख तक लोन
- जनरल श्रेणी को 25% सब्सिडी (मैक्सिमम ₹6.25 लाख)
- SC/ST/विमेन/PwD को 30% सब्सिडी (मैक्सिमम ₹7.50 लाख)
- अपने डिस्ट्रिक्ट के डिस्ट्रिक्ट उद्योग सेंटर से लागू करो
दीन दयाल उपाध्याय घरकुल स्वरोज़गार योजना:
- रिटर्न माइग्रेंट्स और रूरल यूथ ऑफ़ उत्तराखंड के लिए
- स्मॉल बिज़नेस बैंक लोन्स पर सब्सिडी
उत्तराखंड MSME पॉलिसी इंसेंटिव्स:
- उत्तराखंड में लगने वाली यूनिट्स पर कैपिटल निवेश सब्सिडी
- स्टाम्प ड्यूटी एग्ज़ेम्प्शन
- स्पेसिफ़ाइड पीरियड्स के लिए GST रीइम्बर्समेंट
करंटली क्या अवेलेबल है, कैसे पता करें: स्कीम्स बदलती रहती हैं। अपने डिस्ट्रिक्ट उद्योग सेंटर (DIC) जाओ। उत्तराखंड के हर डिस्ट्रिक्ट में एक है। वॉक इन करो, पूछो: "स्मॉल बिज़नेस शुरू करना है, कौन सी स्कीम्स अवेलेबल हैं?" वो करंट लिस्ट दे देंगे। industries.uk.gov.in भी चेक करो।
4. माइक्रोफ़ाइनेंस और सेल्फ़ मदद ग्रुप्स (SHGs)
नीमा चाय नीचे रखती है। "जानते हो हमने होमस्टे ऐक्चुअली कैसे शुरू किया? बैंक लोन से नहीं। अपने SHG से।"
ज्योति ऐड करती है। "सेल्फ़ मदद ग्रुप। हमारे ग्रुप में मुनस्यारी की 11 महिलाएँ हैं। चार साल से हर कोई ₹500 पर मंथ सेव कर रही है। फ़ंड बन गया ₹2,64,000 का। जब हमें घर को होमस्टे में कन्वर्ट करने के लिए पैसे चाहिए थे, तो ग्रुप फ़ंड से ₹1,50,000 लोन लिया, 1% मंथली इंटरेस्ट पर।"
"1% पर मंथ मतलब 12% पर ईयर," भंडारी अंकल पॉइंट आउट करते हैं।
"हाँ," नीमा बोलती है। "लेकिन मुनस्यारी में बैंक में जाकर ट्राई करो — दो जवान लड़कियाँ, कोई आमदनी प्रूफ़ नहीं, कोई कोलैटरल नहीं। कितना इंटरेस्ट देंगे? हम जवाब जानती हैं। एप्लिकेशन फ़ॉर्म भी नहीं देंगे।"
सेल्फ़ मदद ग्रुप्स (SHGs) विमेन एंटरप्रेन्योर्स के लिए सबसे ताक़तवर फ़ंडिंग मेकेनिज़्म्स में से एक हैं — ख़ासकर रूरल और सेमी-अर्बन इलाक़ाज़ में।
SHGs कैसे काम करते हैं:
- 10-20 लोग (इस्तेमालुअली विमेन) ग्रुप बनाते हैं
- हर कोई हर महीने फ़िक्स्ड अमाउंट सेव करता है (₹100 से ₹2,000, ग्रुप पर निर्भर)
- 6 महीने नियमित सेविंग के बाद ग्रुप बैंक अकाउंट खोलता है
- मेंबर्स ग्रुप फ़ंड से बॉरो कर सकते हैं — इंटरेस्ट रेट ग्रुप तय करता है
- नियमित सेविंग्स और इंटर्नल लेंडिंग का ट्रैक रिकॉर्ड बनने के बाद बैंक लिंकेज एलिजिबल हो जाते हैं — बैंक्स SHG को सब्सिडाइज़्ड रेट्स पर लेंड करते हैं
- DAY-NRLM (दीनदयाल अंत्योदय योजना - नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन) के तहत SHGs एक्सेस कर सकते हैं:
- रिवॉल्विंग फ़ंड ₹10,000-15,000 पर SHG
- कम्युनिटी निवेश फ़ंड (CIF) ₹2,50,000 तक
- बैंक लिंकेज लोन्स — पहला राउंड ₹6 लाख तक, दूसरा ₹10 लाख तक, आगे ₹20 लाख तक
उत्तराखंड में ये क्यों मायने रखता है:
- बहुत से रिमोट इलाक़ाज़ में बैंक एक्सेस लिमिटेड है
- विमेन के पास अक्सर इंडिविजुअल कोलैटरल और फ़ॉर्मल आमदनी प्रूफ़ नहीं होता
- SHGs पीअर सपोर्ट और अकाउंटेबिलिटी प्रोवाइड करते हैं
- ULIPH (उत्तराखंड लाइवलीहुड्स सुधार प्रोजेक्ट) ने स्टेट भर में हज़ारों SHGs एस्टैब्लिश किए हैं
माइक्रोफ़ाइनेंस इंस्टीट्यूशन्स (MFIs): SHG में नहीं हो तो MFIs छोटे लोन्स (₹10,000 से ₹1,00,000) इंडिविजुअल को देती हैं, इस्तेमालुअली ग्रुप्स में।
कॉशन: MFI इंटरेस्ट रेट्स ज़्यादा हैं — टिपिकली 20-26% पर ईयर। MFIs से उत्पादिव पर्पसेज़ (भंडार, इक्विपमेंट) के लिए बॉरो करो और जल्दी रीपे करो। नॉन-बिज़नेस नीड्स के लिए MFI से मत लो।
5. एंजल निवेशक
प्रिया (वीडियो कॉल पर — अंकिता के फ़ोन से — बैंगलोर में है): "मेरे लिए फ़ंडिंग की कहानी अलग है। मेरा एग्री-टेक ऐप पहाड़ी किसानों को बायर्स से कनेक्ट करता है। इसे बूटस्ट्रैप नहीं कर सकती थी — ऐप बनाना, सर्वर्स चलाना, डेवलपर्स हायर करना। पहला वर्ज़न बनाने में ही ₹25 लाख चाहिए थे।"
"तो क्या किया?" रावत जी पूछते हैं।
"एंजल निवेशक ढूँढे। दो लोग जिन्हें आइडिया पर बिलीव था — ₹12 लाख-₹12 लाख निवेश किया।"
एंजल निवेशक अनुभव्ड बिज़नेस पीपल होते हैं जो अपना पर्सनल पैसा अर्ली-चरण बिज़नेसेज़ में — टिपिकली स्टार्टअप्स में — निवेश करते हैं।
कैसे काम करता है:
- वो पैसे देते हैं (इस्तेमालुअली अर्ली चरण में ₹5 लाख से ₹50 लाख)
- बदले में कंपनी में ओनरशिप (इक्विटी) का पर्सेंटेज लेते हैं
- मंथली पेमेंट्स नहीं लेते। पैसा तभी बनता है जब कंपनी ग्रो करे और वैल्यूएबल बने — सेल, एक्विज़िशन, या IPO के थ्रू
- पैसे के अलावा मेंटरशिप, इंट्रोडक्शन्स, और बिज़नेस एडवाइस भी देते हैं
ट्रेड-ऑफ़: इंटरेस्ट नहीं देना। लेकिन कंपनी का हिस्सा देना पड़ता है। अगर प्रिया ने ₹24 लाख के लिए 20% इक्विटी दी, और बाद में कंपनी ₹10 करोड़ की हो गई, तो निवेशक के पास ₹2 करोड़ वर्थ ओनरशिप है — किसी भी लोन इंटरेस्ट से कहीं ज़्यादा।
एंजल निवेशक कहाँ मिलते हैं:
- Indian Angel Network (IAN) — इंडिया का सबसे पुराना एंजल नेटवर्क
- Mumbai Angels, Hyderabad Angels, Calcutta Angels — रीजनल नेटवर्क्स
- AngelList India
- स्टार्टअप उत्तराखंड इवेंट्स और कम्युनिटीज़
- LinkedIn — बहुत एंजल्स एक्टिव हैं। लेकिन सब्सटेंस के साथ एप्रोच करो, सिर्फ़ पिच नहीं।
एंजल निवेश रेलेवेंट है अगर:
- राजस्व जेनरेट होने से पहले अहम अपफ़्रंट कैपिटल चाहिए
- कुछ ऐसा बिल्ड कर रहे हो जो स्केल हो सके — टेक उत्पाद, प्लेटफ़ॉर्म, ब्रांड
- पैसे के साथ एक्सपर्टीज़ और कनेक्शन्स भी चाहिए
एंजल निवेश रेलेवेंट नहीं है अगर:
- दुकान, रेस्टोरेंट, या लोकल सेवा बिज़नेस खोल रहे हो। बैंक्स और गवर्नमेंट स्कीम्स बेहतर हैं।
- ₹2-5 लाख चाहिए। एंजल्स इतनी छोटी अमाउंट निवेश नहीं करते।
6. वेंचर कैपिटल — बुनियादी्स
अंकिता प्रिया से पूछती है: "और एंजल निवेशक के बाद? VC फ़ंडिंग के बारे में सुनती रहती हूँ।"
प्रिया समझाती है: "वेंचर कैपिटल अगला लेवल है। VCs फ़र्म्स होती हैं — इंडिविजुअल्स नहीं — जो बड़े पूल्स ऑफ़ मनी मैनेज करती हैं। वो उन कंपनीज़ में निवेश करती हैं जो रियली, रियली फ़ास्ट ग्रो कर सकती हैं।"
वेंचर कैपिटल क्या है:
- VC फ़र्म्स बड़े निवेशक (लिमिटेड साझेदार — पेंशन फ़ंड्स, वेल्दी इंडिविजुअल्स, इंस्टीट्यूशन्स) से पैसा रेज़ करती हैं
- वो पैसा उन स्टार्टअप्स में निवेश करती हैं जो 10-100x ग्रो कर सकें
- बदले में इक्विटी (ओनरशिप) — इस्तेमालुअली हर राउंड में 15-30%
- बिज़नेस में ऐक्टिवली पार्टिसिपेट करती हैं — बोर्ड सीट्स, रणनीति गाइडेंस, हायरिंग मदद
राउंड्स:
| राउंड | टिपिकल अमाउंट | चरण |
|---|---|---|
| प्री-सीड | ₹25 लाख - ₹1 करोड़ | सिर्फ़ आइडिया और टीम |
| सीड | ₹1 करोड़ - ₹5 करोड़ | अर्ली उत्पाद, कुछ इस्तेमालर्स |
| सीरीज़ A | ₹5 करोड़ - ₹30 करोड़ | उत्पाद-मार्केट फ़िट, राजस्व बढ़ रहा |
| सीरीज़ B+ | ₹30 करोड़+ | तेज़ी से स्केलिंग |
इक्विटी डाइल्यूशन — आसान भाषा में:
"मान लो मेरी कंपनी अभी ₹1 करोड़ की है," प्रिया समझाती है। "मेरा 100% है। एक VC ₹50 लाख निवेश करता है और हम अग्री करते हैं कि कंपनी अब ₹1.5 करोड़ की है। VC के ₹50 लाख ₹1.5 करोड़ का 33% है। अब मेरा 67% है, VC का 33%।"
"लेकिन मैंने कोई पैसा नहीं खोया। मेरा 67% of ₹1.5 करोड़ = ₹1 करोड़। पहले जैसा। बस एक साझेदार आ गया।"
"जोखिम ये है — अगर कंपनी ग्रो नहीं हुई? तो मैंने 33% दे दिया उस चीज़ का जो अभी भी ₹1 करोड़ ही है। मेरा शेयर अब सिर्फ़ ₹67 लाख है। ₹33 लाख वैल्यू खो दी।"
इस किताब के ज़्यादातर रीडर्स के लिए VC फ़ंडिंग रेलेवेंट नहीं है। ये एक ख़ास टाइप के बिज़नेस के लिए है — हाई-बढ़त, स्केलेबल, इस्तेमालुअली टेक-एनेबल्ड। ये इन्क्लूड किया है ताकि आप लैंडस्केप समझो, इसलिए नहीं कि सबको VC चेज़ करना चाहिए।
7. क्राउडफ़ंडिंग
अंकिता बोलती है: "मैंने एक बार क्राउडफ़ंडिंग सोचा था। अपने पहाड़ी फ़ूड ब्रांड के लिए। Ketto पर लिस्ट करने वाली थी।"
"क्यों नहीं किया?" पुष्पा दीदी पूछती हैं।
"क्योंकि रियलाइज़ हुआ कि ये कॉज़ या क्रिएटिव प्रोजेक्ट के लिए अच्छा काम करता है। नियमित उत्पाद बिज़नेस के लिए हार्डर है। लोग मिशन फ़ंड करते हैं, सिर्फ़ उत्पाद नहीं।"
क्राउडफ़ंडिंग के टाइप्स:
इनाम-बेस्ड: लोग पैसे देते हैं, बदले में उत्पाद या अनुभव मिलता है। प्लेटफ़ॉर्म्स: Ketto, Milaap, Indiegogo।
- किसके लिए: यूनीक उत्पाद, क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स, कम्युनिटी-ड्रिवन बिज़नेसेज़
- उदाहरण: "मेरा पहाड़ी फ़ूड ब्रांड फ़ंड करो, लॉन्च होने पर 5 उत्पाद का हैम्पर मिलेगा"
डोनेशन-बेस्ड: लोग कॉज़ के लिए पैसे देते हैं।
- किसके लिए: सोशल एंटरप्राइज़ेज़, कम्युनिटी प्रोजेक्ट्स
इक्विटी क्राउडफ़ंडिंग: लोग निवेश करते हैं, शेयर्स मिलते हैं। इंडिया में अभी रेगुलेटेड है और वाइडली अवेलेबल नहीं।
P2P (पीअर-टू-पीअर) लेंडिंग: प्लेटफ़ॉर्म्स जो बॉरोअर्स को सीधे लेंडर्स से कनेक्ट करें। प्लेटफ़ॉर्म्स: Faircent, LenDenClub। इंटरेस्ट रेट्स वेरी (12-30%)।
8. ऐक्चुअली कितने पैसे चाहिए?
भंडारी अंकल टेबल पर हल्का हाथ मारते हैं। "ये सब स्कीम-वीम ठीक है। लेकिन असली सवाल ये है — कितना चाहिए? मैं बहुत लोगों को देखता हूँ जो ₹20 लाख का लोन लेते हैं जब उन्हें ₹5 लाख चाहिए। फिर EMI भरने में मर जाते हैं।"
ये सबसे आम फ़ंडिंग ग़लती है: ऐक्चुअली कितना चाहिए, ये गणना नहीं करना।
दो ख़तरे:
अंडर-रेज़िंग: बहुत कम से शुरू किया, मंथ 3 में पैसे ख़त्म, बिज़नेस बंद — आइडिया ख़राब नहीं था, पैसा कम था।
ओवर-रेज़िंग: ज़रूरत से ज़्यादा लिया, ग़ैर-ज़रूरी चीज़ों पर ख़र्च किया, EMI बिज़नेस सपोर्ट नहीं कर पाया।
गणना कैसे करें:
चरण 1: वन-टाइम सेटअप लागतें लिस्ट करो
| आइटम | अमाउंट |
|---|---|
| रेंट डिपॉज़िट | ₹_____ |
| इक्विपमेंट / मशीनरी | ₹_____ |
| रेनोवेशन / सेटअप | ₹_____ |
| लाइसेंसेज़ और रजिस्ट्रेशन्स | ₹_____ |
| इनिशियल भंडार / रॉ मटीरियल | ₹_____ |
| ब्रांडिंग (साइनबोर्ड, पैकेजिंग डिज़ाइन) | ₹_____ |
चरण 2: मंथली रनिंग लागत गणना करो
| आइटम | अमाउंट |
|---|---|
| रेंट | ₹_____ |
| तनख़्वाहज़ (ख़ुद की भी) | ₹_____ |
| रॉ मटीरियल / भंडार रीस्टॉकिंग | ₹_____ |
| यूटिलिटीज़ (इलेक्ट्रिसिटी, इंटरनेट, फ़ोन) | ₹_____ |
| ट्रांसपोर्ट / डिलीवरी | ₹_____ |
| मार्केटिंग | ₹_____ |
| मिसलेनियस (हमेशा 10-15% बफ़र रखो) | ₹_____ |
चरण 3: मंथली लागत को 6 से मल्टिप्लाई करो
हाँ, छह महीने। अज़्यूम करो कि पहले 3 मंथ्स ज़ीरो राजस्व, अगले 3 मंथ्स पार्शियल राजस्व। बिज़नेस अपने पैर पर खड़ा हो — उतना रनवे चाहिए।
कुल फ़ंडिंग = सेटअप लागतें + (मंथली लागतें x 6)
विक्रम ने ये मैथ किया फ़्रेंचाइज़ी प्लान करते वक़्त:
- फ़्रेंचाइज़ी फ़ी: ₹6,00,000
- शॉप सेटअप और रेनोवेशन: ₹4,50,000
- इक्विपमेंट (ओवन्स, काउंटर्स, POS): ₹3,00,000
- इनिशियल भंडार: ₹1,50,000
- लाइसेंसेज़ और कम्प्लायंस: ₹50,000
- 6 मंथ्स वर्किंग कैपिटल: ₹2,50,000
कुल: ₹18,00,000
₹6 लाख ख़ुद के। पेरेंट्स से ₹4 लाख। MUDRA तरुण लोन: ₹8 लाख। एग्ज़ैक्ट फ़िट।
9. अलग-अलग पैसों की असली क़ीमत
सब पैसा एक जैसा नहीं होता। हर टाइप की फ़ंडिंग की रियल लागत:
| सोर्स | लागत | जोखिम | कंट्रोल |
|---|---|---|---|
| अपनी सेविंग्स | ज़ीरो फ़ाइनेंशियल लागत। लेकिन ऑपर्च्यूनिटी लागत — वो पैसा इंटरेस्ट कमा सकता था या इमरजेंसी में काम आता | पर्सनल सेफ़्टी नेट छोटी हो जाती है | 100% कंट्रोल |
| फ़ैमिली लोन | लो या ज़ीरो इंटरेस्ट। लेकिन रिश्ता जोखिम | बिज़नेस नाकाम हुआ तो रिश्ता सफ़र | 100% कंट्रोल |
| बैंक लोन (MUDRA, MSME) | 8-14% पर ईयर इंटरेस्ट। EMI फ़िक्स्ड है — बिज़नेस अच्छा हो या बुरा | कोलैटरल जोखिम। डिफ़ॉल्ट पर CIBIL स्कोर ख़राब | 100% कंट्रोल |
| गवर्नमेंट सब्सिडी (PMEGP वग़ैरह) | फ़्री — सब्सिडी वापस नहीं करनी | बैंक लोन पोर्शन पर इंटरेस्ट और जोखिम तो है | 100% कंट्रोल |
| माइक्रोफ़ाइनेंस / MFI | 20-26% पर ईयर। महँगा | ग्रुप प्रेशर। डेट ट्रैप बन सकता है | 100% कंट्रोल |
| SHG लोन | 12-24% पर ईयर (ग्रुप तय करता है) | सोशल अकाउंटेबिलिटी | 100% कंट्रोल |
| एंजल निवेशक | नो इंटरेस्ट। लेकिन 10-25% इक्विटी | कंपनी बड़ी हुई तो इक्विटी बहुत वैल्यूएबल | निवेशक को से चाहिए फ़ैसले में |
| वेंचर कैपिटल | नो इंटरेस्ट। लेकिन 15-30% इक्विटी पर राउंड | मल्टिपल राउंड्स के बाद 50% से कम ओन कर सकते हो | VCs बोर्ड सीट्स, वीटो राइट्स लेते हैं |
गोल्डन नियम: सबसे सस्ता सोर्स पहले इस्तेमाल करो। अपना पैसा → गवर्नमेंट सब्सिडी → बैंक लोन → बाक़ी सब।
"सुनो," भंडारी अंकल सबसे बोलते हैं। "₹1 लाख 12% इंटरेस्ट पर 3 साल के लिए — कुल ₹1,20,000 वापस करना। सँभालने लायक़। लेकिन ₹1 लाख एंजल निवेशक से जिसने 20% इक्विटी ली — अगर तुम्हारा बिज़नेस कभी ₹50 लाख का हुआ, तो वो 20% = ₹10 लाख। ₹1 लाख निवेश के लिए ₹10 लाख 'पे' किए। इक्विटी सबसे महँगा पैसा है। तभी लो जब कोई और विकल्प न हो और निवेशक की एक्सपर्टीज़ चाहिए, सिर्फ़ पैसा नहीं।"
10. विक्रम की पूरी फ़ंडिंग स्टोरी
"चलो, पूरी कहानी बताता हूँ," विक्रम बोलता है। "क्योंकि '₹6 + ₹4 + ₹8 = ₹18' जितना स्मूथ नहीं था।"
"फ़्रेंचाइज़ी ऑपर्च्यूनिटी 2022 में मिली। जो ब्रांड पसंद आया, उसे ₹18 लाख कुल निवेश चाहिए था। ₹6 लाख सेविंग्स थी — 4 साल लगे देहरादून की इलेक्ट्रॉनिक्स शॉप में काम करके ये सेव करने में।"
"पहले पेरेंट्स से बात की। उनके पास ₹4 लाख FD में था। माँ बहुत नर्वस थीं — 'पूरा पैसा डूब गया तो?' मैंने कहा: 'एक पेपर साइन करता हूँ कि 2 साल में वापस करूँगा — बिज़नेस चले या न चले।' वो पेपर अभी भी माँ की लॉकर में है।"
"फिर PNB गया MUDRA तरुण लोन के लिए। उद्यम रजिस्ट्रेशन था, फ़्रेंचाइज़ी समझौता था, सब चीज़ों की कोटेशन्स, 6 मंथ्स बैंक स्टेटमेंट्स, PAN-Aadhaar। प्रबंधक ने बोला: 'CIBIL स्कोर 710 है — ओके है, ग्रेट नहीं। कोई गारंटर है?' पापा गारंटर बने।"
"लोन 3 वीक्स में सैंक्शन हुआ। ₹8 लाख, 10.5% इंटरेस्ट, 5 साल रीपेमेंट। EMI: ₹17,200 पर मंथ।"
"लेकिन ये बात कोई नहीं बताता: पहले तीन मंथ्स बेयरली ग्राहकों थे। EMI ₹17,200 और राजस्व ₹35,000-40,000। रेंट, स्टाफ़, भंडार निकालो — EMI सेविंग्स से भर रहा था। सेविंग्स ख़त्म होने लगी।"
"मंथ 4 से पिकअप हुआ। मंथ 6 पर स्टेबल हो गया। मंथ 9 पर आरामदेह। लेकिन वो पहले तीन मंथ्स? ठीक से सोया नहीं। अगर वो ₹2.5 लाख वर्किंग कैपिटल बफ़र नहीं रखा होता, तो EMI डिफ़ॉल्ट हो जाती।"
विक्रम से सीख:
- ₹18 लाख तीन अलग सोर्सेज़ से आए — ये सामान्य है
- बिल्कुल सही योजना के बाद भी पहले मंथ्स रफ़ होते हैं
- वर्किंग कैपिटल बफ़र ने बिज़नेस बचाया
- EMI को तुम्हारे बुरे मंथ्स से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता — हर मंथ ड्यू है
- माँ का कन्सर्न वैलिड था। उसने ऑनेस्टली एड्रेस किया।
11. आम फ़ंडिंग ग़लतियाँ
उत्तराखंड के सैकड़ों स्मॉल बिज़नेस ओनर्स से बात करने के बाद, ये ग़लतियाँ बार-बार दिखती हैं:
1. बिज़नेस लोन की जगह पर्सनल लोन लेना पर्सनल लोन्स में इंटरेस्ट ज़्यादा (14-24%) और रीपेमेंट पीरियड कम होता है। बिज़नेस लोन्स (ख़ासकर MUDRA और MSME) में रेट्स कम, टेन्योर लंबी। पहले हमेशा बिज़नेस लोन लागू करो।
2. गवर्नमेंट सब्सिडीज़ के बारे में नहीं जानना रावत जी को PMEGP से प्रोजेक्ट लागत का 25-35% ग्रांट मिल सकता था। बजाय इसके फ़ुल बैंक लोन ले लिया। लाखों रुपये टेबल पर छूट गए। कोई भी लोन लेने से पहले डिस्ट्रिक्ट उद्योग सेंटर जाओ, सब्सिडीज़ पूछो।
3. साहूकार से उधार लेना 3-5% पर मंथ इंटरेस्ट (36-60% पर ईयर)। ये डेट ट्रैप है। कोई भी और विकल्प — बैंक लोन, MFI, SHG, यहाँ तक कि ऐसेट बेचना — साहूकार से बेहतर है।
4. बिज़नेस का पैसा पर्सनल ख़र्चे में लगाना बिज़नेस लोन बिज़नेस के लिए है। जिस मोमेंट शादी, मेडिकल इमरजेंसी, घर रेनोवेशन में लगाने लगो — बिज़नेस अंडरफ़ंडेड हो गया और लोन रीपेमेंट जोखिम पर। अकाउंट्स अलग रखो।
5. रीपेमेंट प्लान नहीं होना "पैसे आ गए, अब सोचेंगे" प्लान नहीं है। कोई भी लोन लेने से पहले जानो: EMI कितनी है, उस EMI कवर करने के लिए मंथली राजस्व कितना चाहिए, और 3 मंथ्स राजस्व 50% कम हुआ तो क्या होगा?
6. बहुत जल्दी बहुत इक्विटी देना स्टार्टअप पाथ पर हो और एंजल्स या VCs से रेज़ कर रहे हो — पहले राउंड में 15-20% से ज़्यादा मत दो। आगे और रेज़ करना पड़ेगा, और हर राउंड डाइल्यूट करता है। राउंड वन में 40% दे दिया, तो राउंड थ्री तक शायद 30% से कम ओन करोगे।
7. CIBIL स्कोर इग्नोर करना cibil.com पर चेक करो (साल में एक फ़्री चेक)। 650 से नीचे है तो लोन लागू करने से पहले सुधार करो। पुराने क्रेडिट कार्ड ड्इस्तेमाल साफ़ करो। आउटस्टैंडिंग स्मॉल लोन्स भरो। अच्छा CIBIL स्कोर अच्छी रेप्यूटेशन जैसा है — बनने में टाइम लगता है, ख़राब एक मोमेंट में होता है।
8. लोन समझौता नहीं पढ़ना हर पेज पढ़ो। इंटरेस्ट रेट जानो (फ़िक्स्ड है या फ़्लोटिंग?)। प्रीपेमेंट पेनल्टी जानो (कुछ बैंक्स जल्दी रीपे करने का चार्ज लेते हैं)। EMI मिस करने पर क्या होगा, जानो। कुछ समझ नहीं आया तो बैंक दफ़्तरर से सिंपल हिंदी में समझावाओ। ये तुम्हारा राइट है।
क्विक ऐक्शन चेकलिस्ट
बिज़नेस शुरू कर रहे हो और फ़ंडिंग चाहिए, तो इस हफ़्ते ये करो:
- cibil.com पर CIBIL स्कोर चेक करो
- udyamregistration.gov.in पर उद्यम MSME रजिस्ट्रेशन करो (फ़्री)
- डिस्ट्रिक्ट उद्योग सेंटर जाओ, अवेलेबल स्कीम्स पूछो
- कुल फ़ंडिंग नीड गणना करो (सेटअप लागत + 6 मंथ्स रनिंग लागत)
- अपनी सेविंग्स से कितना दे सकते हो, लिस्ट करो
- गैप आइडेंटिफ़ाई करो — और सही फ़ंडिंग सोर्स मैच करो
- डॉक्यूमेंट्स तैयार करो: Aadhaar, PAN, बैंक स्टेटमेंट्स, प्रोजेक्ट रिपोर्ट
- कम से कम 2-3 बैंक ब्रांचेज़ से बात करो। अलग ब्रांच, अलग अनुभव।
चैप्टर एक लाइन में
पुष्पा दीदी कप्स धोने खड़ी होती हैं। "पैसे मिलते हैं," बोलती हैं। "बस पता होना चाहिए कि कहाँ देखना है, कितना लगता है, और कितना ऐक्चुअली चाहिए। उससे ज़्यादा मत लो। उससे कम भी मत लो।"
वो सही बोल रही हैं। पैसा एक टूल है। सही अमाउंट, सही सोर्स से, सही लागत पर। बस।
अगले चैप्टर में ये सब पैसा काम पर लगेगा। फ़ंडिंग मिल गई — अब? बिज़नेस ऐक्चुअली लीगली कैसे सेट अप करें? रजिस्ट्रेशन, लाइसेंसेज़, GST, FSSAI — वो पेपरवर्क जो एक आइडिया को एक रियल, लीगल एंटिटी बनाता है।