टैक्सेशन
वो चिट्ठी जिसने भंडारी अंकल की सुबह ख़राब कर दी
गुरुवार की सुबह है, हल्द्वानी। भंडारी अंकल हमेशा की तरह 9 बजे दुकान खोलते हैं — 22 साल से यही रूटीन। मददर ने डाक दी। ज़्यादातर फ़ालतू है — डिस्ट्रीब्यूटर के फ़्लायर्स, पानी का बिल। लेकिन एक लिफ़ाफ़े पर लिखा है "Government of India"। खोलते हैं तो पेट में गड़बड़ हो जाती है।
GST नोटिस है। कुछ लिखा है "mismatch in GSTR-3B and GSTR-2A for Q3." पूरा तो समझ नहीं आया, लेकिन टोन समझ आ गई। लगता है कुछ गड़बड़ हो गई।
फ़ौरन CA को फ़ोन लगाते हैं। "शर्मा जी, कुछ नोटिस आया है GST का। क्या ग़लत हो गया?"
शर्मा जी — जो 15 साल से भंडारी अंकल का टैक्स देख रहे हैं — शांति से बोलते हैं: "फ़ोटो भेजो। शायद आपूर्तिकर्ता ने लेट फ़ाइलिंग की है, माइनर मिसमैच होगा। मैं सॉर्ट कर दूँगा। लेकिन अंकल, मैं बोलता रहता हूँ — हर क्वार्टर अपनी रिटर्न्स ख़ुद भी चेक करो, बस मेरे भेजे पेपर्स पर साइन मत कर दिया करो।"
भंडारी अंकल बैठ जाते हैं। राहत मिली, लेकिन हिल गए। 22 साल बिज़नेस चलाया — लेकिन अपने टैक्सेस अभी भी ठीक से नहीं समझते। बस CA को सब दे देते हैं और उम्मीद करते हैं कि सब ठीक रहेगा।
ज़्यादातर स्मॉल बिज़नेस ओनर्स ऐसे ही टैक्स सँभालते हैं। CA को दे दो, सवाल मत पूछो, और प्रे करो कि कुछ ग़लत न हो।
ये चैप्टर ये बदलने वाला है। CA बनाने नहीं — वो उनका काम है, और आपको एक ज़रूर हायर करना चाहिए। लेकिन इतना समझ आ जाएगा कि आपके पैसे के साथ क्या हो रहा है, कुछ चीज़ें ऐसे क्यों होती हैं, और CA से सही सवाल कैसे पूछने हैं।
टैक्स एक्साइटिंग नहीं है। लेकिन गवर्नमेंट की नोटिस भी एक्साइटिंग नहीं है। चलिए ऐसा करते हैं कि आपको कभी कोई ऐसी नोटिस न आए जो आप समझाना न कर सकें।
आमदनी टैक्स: सरकार का हिस्सा
हर बिज़नेस जो पैसा कमाता है, आमदनी टैक्स देता है। कितना देना है — ये निर्भर करता है कि आपका बिज़नेस किस स्ट्रक्चर में है।
अगर आप सोल प्रोप्राइटर हैं (ज़्यादातर छोटे बिज़नेसेस)
सबसे सिंपल स्ट्रक्चर। आपकी बिज़नेस आमदनी = आपकी पर्सनल आमदनी। वही स्लैब रेट्स लगती हैं जो किसी भी इंडिविजुअल पर।
FY 2024-25 (न्यू टैक्स रिजीम):
| एनुअल आमदनी | टैक्स रेट |
|---|---|
| ₹3 लाख तक | शून्य |
| ₹3 लाख से ₹7 लाख | 5% |
| ₹7 लाख से ₹10 लाख | 10% |
| ₹10 लाख से ₹12 लाख | 15% |
| ₹12 लाख से ₹15 लाख | 20% |
| ₹15 लाख से ऊपर | 30% |
पुष्पा दीदी की चाय-मैगी की दुकान सोल प्रोप्राइटरशिप है। मान लो सब ख़र्चाेस निकालने के बाद साल का टैक्सेबल मुनाफ़ा ₹5 लाख है। न्यू रिजीम में पहले ₹3 लाख टैक्स-फ़्री, बाक़ी ₹2 लाख पर 5% = ₹10,000 टैक्स। Section 87A की ₹25,000 रिबेट से असलीी ज़ीरो टैक्स। बुरा नहीं है।
अगर साझेदारी फ़र्म है
फ़्लैट रेट: 30% फ़र्म की कुल आमदनी पर, प्लस 4% सेस। बस। कोई स्लैब नहीं। फ़र्म ने ₹5 लाख कमाया हो या ₹5 करोड़ — 30% ही लगेगा।
इसलिए छोटे बिज़नेसेस के लिए साझेदारी टैक्स-वाइज़ महँगी पड़ सकती है। अगर नीमा और ज्योति का होमस्टे साझेदारी फ़र्म है और ₹8 लाख मुनाफ़ा है, तो 30% = ₹2.4 लाख टैक्स। वही आमदनी अगर इंडिविजुअल प्रोप्राइटर्स में स्प्लिट हो तो काफ़ी कम टैक्स लगेगा।
अगर कंपनी है
25% फ़्लैट रेट (सरचार्ज और सेस मिलाकर इफ़ेक्टिव रेट लगभग 25.17% ज़्यादातर स्मॉल कंपनीज़ के लिए)।
कंपनी कब बनानी चाहिए? आम तौर पर जब मुनाफ़े कन्सिस्टेंटली ₹10-15 लाख पर ईयर से ऊपर हों और बढ़ रहे हों। इससे कम में प्रोप्राइटरशिप सिंपल और सस्ती है। बिज़नेस स्ट्रक्चर्स लीगल चैप्टर में डीटेल में कवर हुए हैं — ज़रूरत हो तो वापस जाकर देख लें।
GST: वो टैक्स जिसने सब बदल दिया
2017 से पहले इंडिया में इनसीधा टैक्सेस का अजीब जाल था — एक्साइज़ ड्यूटी, VAT, सेवा टैक्स, एंट्री टैक्स, ऑक्ट्रोई। हर स्टेट की अलग रेट्स। एक स्टेट से दूसरी में सामान भेजना — पेपरवर्क और चेकपोस्ट्स का सिरदर्द।
फिर आया GST — गुड्स एंड सेवाएँ टैक्स। एक देश, एक टैक्स (मोस्टली)।
GST असलीी है क्या?
GST एक कन्ज़म्प्शन टैक्स है। आपूर्ति चेन के हर चरण पर लगता है, लेकिन अल्टिमेटली एंड कन्ज़्यूमर देता है। बीच के बिज़नेसेस बस कलेक्ट करते हैं और गवर्नमेंट को पास करते हैं।
भंडारी अंकल की आपूर्ति चेन में ऐसे काम करता है:
मैन्युफ़ैक्चरर सीमेंट बेचता है डिस्ट्रीब्यूटर को:
दाम: ₹300 पर बैग
GST @18%: ₹54
डिस्ट्रीब्यूटर देता है: ₹354
(मैन्युफ़ैक्चरर ने ₹54 कलेक्ट किया, गवर्नमेंट को भेजा)
डिस्ट्रीब्यूटर बेचता है भंडारी अंकल को:
दाम: ₹350 पर बैग
GST @18%: ₹63
भंडारी अंकल देते हैं: ₹413
(डिस्ट्रीब्यूटर ने ₹63 कलेक्ट किया, लेकिन ₹54 पहले ही मैन्युफ़ैक्चरर को दिया।
डिस्ट्रीब्यूटर गवर्नमेंट को सिर्फ़ ₹63 - ₹54 = ₹9 भेजता है)
भंडारी अंकल बेचते हैं ग्राहक को:
दाम: ₹420 पर बैग
GST @18%: ₹75.60
ग्राहक देता है: ₹495.60
(भंडारी अंकल ने ₹75.60 कलेक्ट किया, लेकिन ₹63 डिस्ट्रीब्यूटर को दिया।
अंकल गवर्नमेंट को सिर्फ़ ₹75.60 - ₹63 = ₹12.60 भेजते हैं)
गवर्नमेंट को कुल GST मिला: ₹54 + ₹9 + ₹12.60 = ₹75.60
ये एग्ज़ैक्टली 18% है फ़ाइनल सेलिंग दाम ₹420 का। टैक्स चेन में से गुज़रा, लेकिन हर किसी ने सिर्फ़ फ़र्क़ भरा। यही GST का मैजिक है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट — GST की जान
वो "फ़र्क़" जो अभी गणना किया? वो है इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC)।
ITC का मतलब: जो GST आपने ख़रीदारी (इनपुट्स) पर दिया, वो आप अपनी बिक्री (आउटपुट) पर कलेक्ट किए GST से घटा सकते हैं।
ग्राहकों से कलेक्ट किया GST: ₹75.60
आपूर्तिकर्ता को दिया GST: - ₹63.00
--------
गवर्नमेंट को असलीी देना है: ₹12.60
इसलिए GST इनवॉइसेस इतने इम्पॉर्टेंट हैं। अगर आपूर्तिकर्ता ने सही GST इनवॉइस नहीं दिया, तो ITC क्लेम नहीं कर सकते। ₹12.60 की जगह पूरे ₹75.60 गवर्नमेंट को देने पड़ेंगे। हर बैग पर ₹63 का नुक़सान।
भंडारी अंकल के साथ यही हुआ। एक सीमेंट आपूर्तिकर्ता लेट रिटर्न्स फ़ाइल कर रहा था। इनवॉइसेस में GST दिखता था, लेकिन आपूर्तिकर्ता ने अपनी रिटर्न्स नहीं भरी थीं — तो सिस्टम में "मिसमैच" दिखा। भंडारी अंकल ITC क्लेम कर रहे थे जो गवर्नमेंट वेरिफ़ाई नहीं कर पा रही थी। इसलिए नोटिस आई।
सबक: आपकी GST कम्प्लायंस उतनी ही अच्छी है जितनी आपके आपूर्तिकर्ता की।
GST रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है क्या?
हर बिज़नेस को रजिस्टर नहीं करना होता। थ्रेशोल्ड्स ये हैं:
| टाइप | थ्रेशोल्ड |
|---|---|
| गुड्स बेचते हैं | ₹40 लाख एनुअल टर्नओवर |
| सेवाएँ देते हैं | ₹20 लाख एनुअल टर्नओवर |
| स्पेशल श्रेणी स्टेट्स (उत्तराखंड भी) | गुड्स: ₹20 लाख, सेवाएँ: ₹10 लाख |
लेकिन — कुछ केसेस में टर्नओवर चाहे कितना भी हो, रजिस्टर करना ज़रूरी है:
- अगर दूसरे स्टेट में बेचते हैं (इंटर-स्टेट आपूर्ति)
- ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म्स पर बेचते हैं (Amazon, Flipkart)
- GST TDS डिडक्ट करना हो
अंकिता अपने पहाड़ी फ़ूड उत्पाद इंस्टाग्राम पर बेचती है और पूरे इंडिया में शिप करती है। टर्नओवर सिर्फ़ ₹12 लाख है, लेकिन इंटर-स्टेट आपूर्ति होने की वजह से GST रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है। उसे ये तब पता चला जब Amazon ने सेलर एप्लीकेशन ख़ारिज कर दिया — GSTIN नहीं था।
GST रिटर्न्स — पेपरवर्क
GST रजिस्टर्ड हैं तो रिटर्न्स फ़ाइल करने होंगे। मेन ये हैं:
GSTR-1 — आपकी सारी बिक्री की डीटेल्स। मंथली फ़ाइल होता है (टर्नओवर > ₹5 करोड़) या क्वार्टरली (टर्नओवर < ₹5 करोड़, QRMP स्कीम)। ड्यू डेट: अगले मंथ/क्वार्टर की 11/13 तारीख़।
GSTR-3B — समरी रिटर्न। कुल सेल्स, कुल परचेज़ेस, ITC क्लेम्ड, नेट टैक्स — सब इसमें। मंथली या क्वार्टरली। ड्यू डेट: अगले मंथ की 20 तारीख़।
GSTR-9 — एनुअल रिटर्न। पूरे साल का समरी। ड्यू डेट: अगले फ़ाइनेंशियल ईयर की 31 दिसंबर।
ऐसे सोचो: GSTR-1 डीटेल्स है, GSTR-3B समरी है, और GSTR-9 सालाना रिपोर्ट कार्ड है।
GST कम्प्लायंस — जहाँ लोग फँसते हैं
इनवॉइसिंग: हर GST इनवॉइस में होना चाहिए — आपका GSTIN, बायर का GSTIN (अगर रजिस्टर्ड है), HSN कोड (गुड्स के लिए) या SAC कोड (सेवाएँ के लिए), टैक्स रेट, और टैक्स अमाउंट अलग दिखाना (CGST + SGST लोकल सेल्स में, IGST इंटर-स्टेट सेल्स में)।
HSN कोड्स: हर उत्पाद का एक क्लासिफ़िकेशन कोड होता है। सीमेंट 2523 है, आयरन-स्टील 7208 है, चाय 0902 है। CA मदद करेगा सही कोड्स पता करने में, लेकिन अपने मेन उत्पाद के कोड्स आपको पता होने चाहिए। ग़लत कोड मतलब ग़लत टैक्स रेट।
फ़ाइलिंग डेडलाइन्स: डेडलाइन मिस करो तो ₹50 पर डे लेट फ़ी (निल रिटर्न्स पर ₹20)। जल्दी बढ़ता है। ज़्यादा देर हुई तो रजिस्ट्रेशन सस्पेंड हो सकता है।
रिकन्सिलिएशन: हर क्वार्टर चेक करो कि आपूर्तिकर्ता ने जो रिपोर्ट किया और आपने जो ITC क्लेम किया — मैच हो रहा है। भंडारी अंकल की समस्या यहीं से आई। CA करेगा ये काम, लेकिन आपको पूछते रहना चाहिए।
कम्पोज़िशन स्कीम — आसान, सस्ता, लिमिटेड
अगर टर्नओवर ₹1.5 करोड़ से कम है (सेवा प्रोवाइडर्स के लिए ₹75 लाख), तो कम्पोज़िशन स्कीम ले सकते हैं। नियमित GST प्रक्रिया की जगह फ़्लैट रेट देना है:
| टाइप | कम्पोज़िशन रेट |
|---|---|
| मैन्युफ़ैक्चरर्स | 1% (0.5% CGST + 0.5% SGST) |
| ट्रेडर्स | 1% |
| रेस्टोरेंट्स | 5% |
| सेवा प्रोवाइडर्स | 6% (3% CGST + 3% SGST) |
ट्रेड-ऑफ़:
- इनवॉइस पर GST चार्ज नहीं कर सकते (आपकी दाम = फ़ाइनल दाम)
- इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम नहीं कर सकते
- दूसरे स्टेट में बेच नहीं सकते (सिर्फ़ अपने स्टेट में)
- क्वार्टर में एक रिटर्न (CMP-08) — बहुत सिंपल
- ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म्स पर बेच नहीं सकते
पुष्पा दीदी की चाय-मैगी दुकान के लिए कम्पोज़िशन स्कीम बिल्कुल सही है। टर्नओवर ₹8-10 लाख, सब लोकल सेल्स, और ITC की ज़रूरत भी नहीं क्योंकि इनपुट्स (दूध, चाय, सब्ज़ी) ज़्यादातर अनरजिस्टर्ड लोकल वेंडर्स से आते हैं। 1% क्वार्टरली दो और एक सिंपल रिटर्न फ़ाइल करो। बस।
भंडारी अंकल के लिए कम्पोज़िशन बुरा आइडिया होगा। टर्नओवर ₹1 करोड़ से ऊपर है, और इन्वेंटरी परचेज़ेस पर ITC छोड़ना मतलब लाखों का नुक़सान।
TDS: टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स
TDS गवर्नमेंट का तरीक़ा है टैक्स कलेक्ट करने का जैसे आमदनी आ रही है — साल के अंत का इंतज़ार किए बिना।
स्मॉल बिज़नेसेस के लिए कब मायने रखता है:
जब आपसे TDS कटता है
अगर आप किसी कंपनी या गवर्नमेंट बॉडी के लिए काम करते हैं, तो वो पेमेंट से पहले TDS काट लेंगे।
नीमा और ज्योति के होमस्टे को एक कॉर्पोरेट ट्रैवल कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट मिला — टीम रिट्रीट्स होस्ट करने का। कंपनी ने ₹2,00,000 की बुकिंग की। लेकिन पेमेंट आया ₹1,80,000। कंपनी ने 10% TDS (₹20,000) काटकर गवर्नमेंट को जमा कर दिया नीमा की तरफ़ से।
वो ₹20,000 गए नहीं — वो नीमा के आमदनी टैक्स का एडवांस पेमेंट है। साल के अंत में रिटर्न फ़ाइल करते वक़्त TDS का क्रेडिट क्लेम करेंगी और बाक़ी बचा टैक्स भरेंगी।
जब आपको TDS काटना होता है
अगर आपका बिज़नेस सर्टेन अमाउंट्स से ऊपर पेमेंट्स करता है, तो आपकी ज़िम्मेदारी है TDS काटने की:
- तनख़्वाह एम्प्लॉईज़ को — उनकी आमदनी स्लैब के हिसाब से TDS
- रेंट ₹2.4 लाख पर ईयर से ऊपर — 10% काटो
- पेशेवर फ़ीस ₹30,000 पर ईयर से ऊपर — 10% काटो
- कॉन्ट्रैक्टर पेमेंट्स ₹30,000 (सिंगल पेमेंट) या ₹1 लाख (एनुअल) से ऊपर — 1% (इंडिविजुअल्स), 2% (कंपनीज़)
विक्रम का फ़्रेंचाइज़ी आउटलेट देहरादून में ₹3 लाख रेंट देता है और ₹50,000 इंटीरियर डिज़ाइनर को। दोनों पर TDS काटना होगा — रेंट पर 10% (₹30,000) और डिज़ाइनर की फ़ीस पर 10% (₹5,000)। ये गवर्नमेंट को जमा करना है और लैंडलॉर्ड-डिज़ाइनर को TDS सर्टिफ़िकेट (Form 16A) देना है।
अगर ये नहीं किया? पेनल्टी ये है कि वो ख़र्चा नॉन-डिडक्टिबल हो जाता है। विक्रम ने ₹3 लाख रेंट दिया, लेकिन TDS नहीं काटा तो टैक्स डिपार्टमेंट उसे बिज़नेस ख़र्चा मानने से मना कर देगा। पूरे ₹3 लाख का टैक्स फ़ायदा गया।
TDS काटने के लिए TAN चाहिए (टैक्स डिडक्शन अकाउंट नंबर)। TRACES पोर्टल पर लागू करो। क्वार्टरली TDS रिटर्न्स (Form 26Q) CA फ़ाइल करेगा।
एडवांस टैक्स: थोड़ा-थोड़ा करके भरो
अगर साल का कुल टैक्स ₹10,000 से ज़्यादा है, तो गवर्नमेंट चाहती है कि इंस्टॉलमेंट्स में भरो — मार्च में एक साथ नहीं।
शेड्यूल ये है:
| ड्यू डेट | कुल एस्टिमेटेड एनुअल टैक्स का कितना % |
|---|---|
| 15 जून | 15% |
| 15 सितंबर | 45% |
| 15 दिसंबर | 75% |
| 15 मार्च | 100% |
रावत जी का अंदाज़ा है कि जूस बिज़नेस से इस साल ₹6 लाख मुनाफ़ा होगा। एस्टिमेटेड टैक्स लगभग ₹33,000। भरना होगा:
- 15 जून तक ₹4,950
- 15 सितंबर तक ₹9,900 और (कुल ₹14,850)
- 15 दिसंबर तक ₹9,900 और (कुल ₹24,750)
- 15 मार्च तक ₹8,250 और (कुल ₹33,000)
ये मायने क्यों करता है? अगर एडवांस टैक्स नहीं भरा और फ़ाइलिंग टाइम पर सब एक साथ दिया, तो Section 234B और 234C के तहत इंटरेस्ट लगेगा। 1% पर मंथ — बहुत ज़्यादा नहीं, लेकिन बिल्कुल बचा जा सकता है।
एक्सेप्शन: अगर Section 44AD (प्रिज़म्प्टिव टैक्सेशन) ऑप्ट किया है, तो पूरा एडवांस टैक्स 15 मार्च तक एक बार में भर सकते हैं। क्वार्टरली इंस्टॉलमेंट्स की ज़रूरत नहीं।
टैक्स योजना: क़ानूनी तरीक़े से टैक्स बचाना
टैक्स योजना और टैक्स इवेज़न अलग चीज़ें हैं। टैक्स इवेज़न — आमदनी छिपाना, फ़र्ज़ी ख़र्चे दिखाना — ये इललीगल है, और कभी न कभी पकड़ा जाता है। टैक्स योजना — टैक्स लॉ की प्रोविज़न्स का इस्तेमाल करके लीगली टैक्स कम करना। हर स्मार्ट बिज़नेस ओनर करता है।
1. हर लेजिटिमेट बिज़नेस ख़र्चा क्लेम करो
टैक्सेबल मुनाफ़ा = राजस्व - ख़र्चाेस। जितने ज़्यादा जेन्यूइन बिज़नेस ख़र्चाेस क्लेम करोगे, टैक्सेबल मुनाफ़ा उतना कम, टैक्स उतना कम।
ये ख़र्चाेस क्लेम करने चाहिए:
- रेंट — दुकान, दफ़्तर, वर्कस्पेस का
- तनख़्वाहज़ और वेजेस — एम्प्लॉईज़ और मददर्स को
- रॉ मटीरियल्स और इन्वेंटरी — ख़रीदी हुई
- बिजली, पानी, फ़ोन बिल्स — बिज़नेस प्रेमिसेस के
- ट्रैवल ख़र्चाेस — बिज़नेस से रिलेटेड (आपूर्तिकर्ता विज़िट, डिलीवरी, क्लाइंट मीटिंग)
- व्हीकल ख़र्चाेस — बिज़नेस इस्तेमाल के लिए (फ़्यूल, बनाए रखेंस — बिज़नेस इस्तेमाल के प्रोपोर्शन में)
- इंश्योरेंस प्रीमियम्स — बिज़नेस का
- बिज़नेस लोन्स का इंटरेस्ट
- पेशेवर फ़ीस — CA, वक़ील, कन्सल्टेंट
- रिपेयर्स और बनाए रखेंस — बिज़नेस इक्विपमेंट की
- मार्केटिंग और एडवर्टाइज़िंग लागतें
- सॉफ़्टवेयर, टूल्स, सब्सक्रिप्शन्स — बिज़नेस में इस्तेमाल होने वाले
- डेप्रिसिएशन — एसेट्स पर (नीचे कवर करेंगे)
अंकिता अपना पहाड़ी फ़ूड ब्रांड देहरादून में एक किराए के कमरे से चलाती है। फ़ोन-लैपटॉप इंस्टाग्राम मार्केटिंग के लिए, कार डिलीवरीज़ के लिए, उत्पाद फ़ोटोग्राफ़ी के लिए पे करती है। ये सब बिज़नेस ख़र्चाेस हैं। पिछले साल ₹45,000 — फ़ोन बिल्स, फ़्यूल, फ़ोटोग्राफ़ी — क्लेम करना भूल गई क्योंकि रिसीट्स नहीं रखी थीं। 20% टैक्स रेट पर ₹9,000 फ़ालतू टैक्स दे दिया।
हर रिसीट रखो। हर एक।
2. Section 44AD — प्रिज़म्प्टिव टैक्सेशन
ये स्मॉल बिज़नेसेस के लिए तोहफ़ा है। अगर टर्नओवर ₹2 करोड़ से कम है (₹3 करोड़ अगर 95%+ पेमेंट्स डिजिटल हैं), तो मुनाफ़ा एक फ़िक्स्ड परसेंटेज डिक्लेयर करो और डीटेल्ड बुक्स ऑफ़ अकाउंट्स रखने की ज़रूरत नहीं।
प्रिज़म्प्टिव मुनाफ़ा रेट्स:
- कैश में मिला टर्नओवर — 8%
- डिजिटल पेमेंट्स (UPI, बैंक ट्रांसफ़र, कार्ड) — 6%
भंडारी अंकल की हार्डवेयर दुकान का टर्नओवर ₹1.2 करोड़ है। मान लो ₹80 लाख डिजिटल पेमेंट्स हैं और ₹40 लाख कैश।
प्रिज़म्प्टिव मुनाफ़ा = (₹80 लाख x 6%) + (₹40 लाख x 8%) = ₹4.8 लाख + ₹3.2 लाख = ₹8 लाख
असली मुनाफ़ा? शायद ₹10-12 लाख। Section 44AD से सिर्फ़ ₹8 लाख टैक्सेबल आमदनी डिक्लेयर करना है। लीगल, सिंपल, और लगभग ₹60,000-₹1,20,000 टैक्स बच जाता है स्लैब के हिसाब से।
प्लस — फ़ुल बुक्स ऑफ़ अकाउंट्स रखने या ऑडिट कराने की ज़रूरत नहीं। बस सिंपल रिटर्न।
कैच: अगर असली मुनाफ़ा प्रिज़म्प्टिव रेट से कम है (मार्जिन्स बहुत थिन हैं), तो कम डिक्लेयर कर सकते हैं — लेकिन फिर फ़ुल बुक्स बनाए रख करने और ऑडिट कराने पड़ेंगे। CA से बात करो।
3. एसेट्स पर डेप्रिसिएशन
जब कोई बड़ा एसेट ख़रीदते हैं — मशीन, कंप्यूटर, व्हीकल, फ़र्नीचर — तो पूरी लागत पहले साल नहीं घटा सकते। डेप्रिसिएशन से कई सालों में क्लेम होता है।
आम डेप्रिसिएशन रेट्स:
| एसेट | रेट |
|---|---|
| बिल्डिंग | 10% |
| फ़र्नीचर और फ़िटिंग्स | 10% |
| मशीनरी और इक्विपमेंट | 15% |
| कंप्यूटर और सॉफ़्टवेयर | 40% |
| व्हीकल | 15% (कार), 30% (कमर्शियल व्हीकल) |
रावत जी ने जूस प्रक्रियािंग मशीन ₹5,00,000 में ख़रीदी। पहले साल 15% डेप्रिसिएशन = ₹75,000 ख़र्चा क्लेम। दूसरे साल बचे ₹4,25,000 का 15% = ₹63,750। ऐसे चलता रहता है।
मतलब पहले साल टैक्सेबल मुनाफ़ा से ₹75,000 कम हुआ। 20% टैक्स ब्रैकेट में ₹15,000 टैक्स बचा — सिर्फ़ इस एक मशीन से।
बोनस: पहले साल जब एसेट ख़रीदकर इस्तेमाल में लाते हैं, मैन्युफ़ैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाली प्लांट और मशीनरी पर 20% एडिशनल डेप्रिसिएशन भी क्लेम कर सकते हैं। तो रावत जी पहले साल 15% + 20% = 35% क्लेम कर सकते हैं — ₹1,75,000 टैक्सेबल मुनाफ़ा से कम।
4. पर्सनल और बिज़नेस ख़र्चे अलग रखो
इतनी सिंपल बात है, फिर भी इतने स्मॉल बिज़नेस ओनर्स ग़लत करते हैं।
अगर पर्सनल और बिज़नेस ट्रांज़ैक्शन्स एक ही बैंक अकाउंट से हो रहे हैं, तो CA की ज़िंदगी मुश्किल कर रहे हो, ख़ुद की भी, और शायद टैक्स डिपार्टमेंट की भी। जब सब मिक्स हो जाए:
- बिज़नेस असलीी कितना कमा रहा है — पता नहीं चलता
- पर्सनल ख़र्चाेस बिज़नेस ख़र्चाेस में दिखा सकते हो (ऑडिट हुआ तो मुसीबत)
- जेन्यूइन बिज़नेस ख़र्चाेस क्लेम करना भूल सकते हो
- बुक्स गंदी दिखती हैं, और गंदी बुक्स स्क्रूटनी आकर्षित करती हैं
भंडारी अंकल पहले बेटे की स्कूल फ़ीस, पत्नी का मेडिकल बिल, और दुकान की बिजली — सब एक ही अकाउंट से भरते थे। CA हर साल घंटों लगाता था पर्सनल vs बिज़नेस अलग करने में। अब अलग करंट अकाउंट है दुकान का। हर बिज़नेस ट्रांज़ैक्शन उसी से। हर पर्सनल निकासी "ओनर्स ड्रॉइंग" में रिकॉर्ड। साफ़, सिंपल, ऑडिट-रेडी।
अपने बिज़नेस के लिए अलग करंट अकाउंट खोलो। बैंकिंग चैप्टर में डीटेल में आएगा।
CA क्यों चाहिए — डे 1 से
सीधी बात: ख़ुद अपने CA मत बनो।
हाँ, टैक्सेस समझने चाहिए — इसीलिए ये चैप्टर है। लेकिन टैक्सेस समझना और ख़ुद टैक्सेस करना — दो बहुत अलग बातें हैं। टैक्स लॉ हर साल बदलता है। GST नियम तो और भी ज़्यादा बदलते हैं। फ़ॉर्म्स, डेडलाइन्स, गणना, कम्प्लायंस — जेन्यूइनली कॉम्प्लेक्स हैं।
अच्छा CA ये करेगा:
- आमदनी टैक्स और GST रिटर्न्स सही से और टाइम पर फ़ाइल करेगा
- सही बिज़नेस स्ट्रक्चर चूज़ करने में मदद करेगा
- बुक्स और अकाउंटिंग सिस्टम्स सेट अप करेगा
- हर डिडक्शन क्लेम कराएगा जो आपका हक़ है
- एडवांस टैक्स गणना में मदद करेगा
- टैक्स डिपार्टमेंट की नोटिसेस और कम्यूनिकेशन्स सँभालेगा
- टैक्स योजना में एडवाइस देगा — लीगली टैक्स कम करने में
- मुसीबत से दूर रखेगा
CA की लागत कितनी?
स्मॉल बिज़नेस के लिए:
- आमदनी टैक्स रिटर्न फ़ाइलिंग: ₹3,000-₹8,000 पर ईयर
- GST रिटर्न फ़ाइलिंग: ₹1,000-₹3,000 पर मंथ
- कम्प्लीट टैक्स + कम्प्लायंस पैकेज: ₹15,000-₹40,000 पर ईयर
ये लागत नहीं है। ये निवेश है। अच्छा CA अपनी फ़ीस से कई गुना ज़्यादा बचाएगा टैक्स सेविंग्स और पेनल्टी से बचाव में।
शर्मा जी भंडारी अंकल से ₹25,000 पर ईयर लेते हैं — ITR, GST रिटर्न्स, TDS, और एडवाइस सब। पिछले साल शर्मा जी ने ₹1.2 लाख का ITC मिसमैच पकड़ा जिस पर पेनल्टी आती, न्यू टैक्स रिजीम में स्विच करने की एडवाइस दी (₹18,000 बचे), और एडवांस टैक्स टाइम पर भरवाया (₹4,000 इंटरेस्ट से बचे)। वो ₹25,000 फ़ीस ने कम से कम ₹1,40,000 बचाए। शर्मा जी का फ़ोन नंबर सोने से क़ीमती है।
अच्छा CA कैसे ढूँढें
- अपने इलाक़ा के दूसरे बिज़नेस ओनर्स से पूछो
- ऐसा CA चुनो जो स्मॉल बिज़नेसेस में स्पेशलाइज़ करे (बड़ी फ़र्म के CAs शायद अटेंशन न दें)
- डेडलाइन्स के बारे में प्रोएक्टिव हो — आपको चेज़ न करना पड़े
- आपकी भाषा में समझाए, जार्गन में नहीं
- एक्सेसिबल हो — नोटिस आए तो जल्दी रिस्पॉन्ड करे
स्मॉल बिज़नेसेस की आम टैक्स ग़लतियाँ
उत्तराखंड के दर्जनों स्मॉल बिज़नेस ओनर्स से बात करने के बाद — ये ग़लतियाँ बार-बार सामने आती हैं:
1. GST रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जबकि ज़रूरी था। "टर्नओवर छोटा है" — लेकिन दूसरे स्टेट में बेच रहे हो, या Amazon पर हो, या टर्नओवर थ्रेशोल्ड क्रॉस कर गया और ध्यान नहीं दिया। पेनल्टीज़ लग जाती हैं।
2. पर्सनल और बिज़नेस पैसे मिक्स करना। ऊपर कवर हो गया। अलग अकाउंट खोलो। आज।
3. रिसीट्स और इनवॉइसेस नहीं रखना। ख़र्चा प्रूव नहीं कर सकते तो क्लेम नहीं कर सकते। रिसीट्स की डिजिटल फ़ोटोज़ भी चलती हैं। Khatabook जैसी ऐप्स या सिंपल फ़ोल्डर सिस्टम — बस रखो।
4. रिटर्न्स लेट फ़ाइल करना। आमदनी टैक्स लेट फ़ाइलिंग फ़ी: ₹5,000 (आमदनी ₹5 लाख से कम हो तो ₹1,000)। GST: ₹50 पर डे। TDS: ₹200 पर डे। ये पैसे बिल्कुल बेकार जाते हैं।
5. एडवांस टैक्स नहीं भरना। इंटरेस्ट चार्जेस 1% पर मंथ हैं। ₹50,000 टैक्स लायबिलिटी पर साल के ₹6,000 टालनाेबल इंटरेस्ट।
6. TDS ऑब्लिगेशन्स इग्नोर करना। रेंट दे रहे हो? कॉन्ट्रैक्टर को पे कर रहे हो? पेशेवर फ़ीस दे रहे हो? चेक करो TDS एप्लिकेबल है या नहीं। TDS नहीं काटा तो पूरे ख़र्चा का डिडक्शन गया।
7. GST रिटर्न्स रिकन्साइल नहीं करना। आपूर्तिकर्ता ने जो रिपोर्ट किया और आपने जो क्लेम किया — मैच होना चाहिए। हर क्वार्टर चेक करो। CA करेगा, लेकिन पूछते रहो।
8. टैक्स के हिसाब से ग़लत बिज़नेस स्ट्रक्चर चुनना। साझेदारी 30% दे रहा है जबकि प्रोप्राइटरशिप में 10% लगता उसी आमदनी पर। स्ट्रक्चर मायने्स। हर कुछ साल CA से समीक्षा करो जैसे आमदनी बढ़े।
9. Section 44AD एलिजिबल होकर इस्तेमाल नहीं करना। क्वालिफ़ाई करते हो तो ऑलमोस्ट हमेशा फ़ायदेमंद है। पेचीदा बुक्स मत रखो जब आसान विकल्प मौजूद है।
10. पैसे बचाने के लिए ख़ुद टैक्स करना। भंडारी अंकल के पड़ोसी ने YouTube ट्यूटोरियल्स देखकर ख़ुद GST रिटर्न्स फ़ाइल करने की कोशिश की। तीन क्वार्टर्स में त्रुटियाँ, दो नोटिसेस, और आख़िर में CA को ₹40,000 दिए मेस फ़िक्स करने के लिए — शुरू से CA हायर करते तो आधे से भी कम लगता।
सब एक साथ
स्मॉल बिज़नेस ओनर के लिए टैक्स चेकलिस्ट:
शुरुआत में:
- PAN कार्ड बनवाओ (अगर नहीं है)
- बिज़नेस स्ट्रक्चर तय करो (प्रोप्राइटरशिप, साझेदारी, कंपनी)
- GST रजिस्टर करो (अगर एप्लिकेबल है)
- TAN लो (अगर TDS काटना हो)
- CA हायर करो
- अलग बिज़नेस बैंक अकाउंट खोलो
हर मंथ/क्वार्टर:
- GST रिटर्न्स टाइम पर फ़ाइल करो (GSTR-1, GSTR-3B)
- TDS जमा करो
- इनवॉइसेस और रिसीट्स व्यवस्थित्ड रखो
- GST ITC क्लेम्स रिकन्साइल करो
साल में चार बार:
- एडवांस टैक्स भरो (जून, सितंबर, दिसंबर, मार्च)
- TDS रिटर्न्स फ़ाइल करो (Form 26Q)
- CA के साथ आमदनी और टैक्स प्रोजेक्शन्स समीक्षा करो
साल में एक बार:
- आमदनी टैक्स रिटर्न फ़ाइल करो (ड्यू डेट: 31 जुलाई नॉन-ऑडिट, 31 अक्टूबर ऑडिट केसेस)
- GST एनुअल रिटर्न (GSTR-9, 31 दिसंबर तक)
- CA के साथ बिज़नेस स्ट्रक्चर और टैक्स रणनीति समीक्षा करो
- ऑडिट कराओ अगर टर्नओवर ₹1 करोड़ से ऊपर है (₹10 करोड़ अगर 95%+ डिजिटल पेमेंट्स)
भंडारी अंकल को जो GST नोटिस आई थी? शर्मा जी ने दो दिन में हल कर दी। आपूर्तिकर्ता ने लेट फ़ाइलिंग कर दी थी, जैसे ही फ़ाइलिंग हुई — मिसमैच ग़ायब। कोई पेनल्टी नहीं। कोई ड्रामा नहीं।
लेकिन भंडारी अंकल ने उस गुरुवार सुबह कुछ ज़रूरी सीखा: अपने टैक्सेस के बारे में अनजान रहना अफ़ोर्ड नहीं कर सकते। एक्सपर्ट बनने की ज़रूरत नहीं। लेकिन इतना पता होना चाहिए कि सही सवाल पूछ सकें, सही चीज़ें चेक कर सकें, और समस्याएँ को नोटिस बनने से पहले पकड़ सकें।
अब वो हर क्वार्टर शर्मा जी के साथ GST समरी समीक्षा करते हैं। 20 मिनट लगता है। क्वार्टर के सबसे उत्पादिव 20 मिनट्स हैं।
अगले चैप्टर में भंडारी अंकल के साथ स्टेट बैंक चलते हैं। बिज़नेस एक्सपैंशन के लिए लोन चाहिए, लेकिन ब्रांच प्रबंधक ऐसे डॉक्यूमेंट्स माँग रहा है जिनका नाम भी नहीं सुना। करंट अकाउंट, CC लिमिट, CIBIL स्कोर — ये क्या होता है? और पहली लोन एप्लीकेशन ख़ारिज क्यों हुई? बैंकिंग समझने का वक़्त है — वो पाइप्स जिनसे बिज़नेस का सारा पैसा बहता है।