लीगल, रजिस्ट्रेशन और कम्प्लायंस

वो ईमेल जिसने अंकिता की मंगलवार बर्बाद कर दी

रात के 10 बज रहे हैं, मंगलवार है। अंकिता Dehradun में अपने बेड पर बैठी इंस्टाग्राम रील्स एडिट कर रही है अपने पहाड़ी फ़ूड ब्रांड के लिए। ऑर्डर्स अच्छे चल रहे हैं — पिछले महीने 340 जार्स भुरानी रायता शिप किए। फ़ोन बज़ होता है। एक ईमेल — Delhi की किसी लॉ फ़र्म से।

"LEGAL NOTICE: Food Safety and Standards Act, 2006 का उल्लंघन। हमारे क्लाइंट ने आपका उत्पाद 'पहाड़ी ज़ायका' ब्रांड नेम से परचेज़ किया है जिस पर वैलिड FSSAI लाइसेंस नम्बर डिस्प्ले नहीं है। आपकी FSSAI बुनियादी रजिस्ट्रेशन 15 मार्च को एक्सपायर हो चुकी है। FSS Act की सेक्शन 63 के तहत बिना वैलिड लाइसेंस के ऑपरेट करना 6 महीने तक की कैद और ₹5 लाख तक के जुर्माने से पनिशेबल है..."

अंकिता की धड़कन तेज़ हो गई। लैपटॉप खोलकर FSSAI पोर्टल चेक किया — नोटिस सही है। रजिस्ट्रेशन 5 महीने पहले एक्सपायर हो गई थी। दिवाली रश सीज़न में रिमाइंडर डिसमिस कर दिया था। रिन्यू ही नहीं किया।

रात 10:30 बजे प्रिया को कॉल किया, रोने की हालत में। "प्रिया, मेरी FSSAI लैप्स हो गई। लीगल नोटिस आ गया है। क्या होगा?"

प्रिया, जिसका ख़ुद का MCA एनुअल रिटर्न भूलने का अनुभव है, बोली: "सांस ले। फ़िक्स हो जाएगा। लेकिन अंकिता — यही वो चीज़ है जो बिज़नेस को बैड सेल्स से भी ज़्यादा तेज़ी से किल कर सकती है। कम्प्लायंस को गंभीरली लेना होगा। वन-टाइम नहीं — मंथली हैबिट बनाना होगा।"

अंकिता की कहानी अनइस्तेमालुअल नहीं है। पूरे India में हज़ारों स्मॉल बिज़नेसेज़ लीगल ट्रबल में फंसती हैं — इसलिए नहीं कि वो कुछ ग़लत कर रहे हैं, बल्कि इसलिए कि एक रिन्यूअल डेट भूल गए, पता नहीं था कि लाइसेंस चाहिए, या अस्यूम कर लिया कि "छोटे बिज़नेस को ये सब नहीं लगता।"

लगता है। और अच्छी बात ये है: ज़्यादातर पेचीदा नहीं है। बस पेपरवर्क है। इस चैप्टर में हम हर रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस, और लीगल रिक्वायरमेंट को कवर करेंगे — असली चरण, असली लागतें, और असली वेबसाइट्स के साथ।

लीगल कम्प्लायंस को इंश्योरेंस समझो। थोड़ा टाइम और पैसा अपफ़्रंट दो, और ये आपको ऐसी डिज़ास्टर्स से बचाता है जो बिज़नेस बंद करवा सकती हैं।


बिज़नेस स्ट्रक्चर्स: अपने बिज़नेस का लीगल फ़ॉर्म चूज़ करना

कुछ भी रजिस्टर करने से पहले ये तय करना ज़रूरी है कि आपका बिज़नेस किस तरह की लीगल एंटिटी होगा। ये फ़ैसला आपके टैक्सेज़, लाइबिलिटी, फ़ंडिंग रेज़ करने की एबिलिटी, और कम्प्लायंस पेपरवर्क — सब पर असर डालता है।

1. सोल प्रोप्राइटरशिप — सबसे आसान रास्ता

पुष्पा दीदी की चाय-मैगी शॉप ऋषिकेश में Triveni Ghat के पास सोल प्रोप्राइटरशिप है। कोई कंपनी रजिस्टर नहीं करवाई। Rishikesh नगर पालिका से शॉप & एस्टेबलिशमेंट लाइसेंस लिया, अपने नाम का बैंक अकाउंट खोला GST सर्टिफ़िकेट के साथ, और चाय बेचना शुरू।

क्या है: आप ही बिज़नेस हो। कोई अलग लीगल एंटिटी नहीं। बिज़नेस आमदनी = पर्सनल आमदनी। बिज़नेस डेट्स = पर्सनल डेट्स।

फ़ायदे:

  • शुरू करना सबसे आसान — MCA रजिस्ट्रेशन, MOA/AOA कुछ नहीं चाहिए
  • सबसे कम ख़र्च — बस लोकल लाइसेंसेज़ और PAN कार्ड
  • पूरा कंट्रोल — सारे फ़ैसले आपके
  • टैक्स फ़ायदा — इंडिविजुअल स्लैब्स पर टैक्स, फ़्लैट 30% नहीं

नुक़सान:

  • अनलिमिटेड लाइबिलिटी — बिज़नेस पर ₹10 लाख का क़र्ज़ है तो आपकी पर्सनल सेविंग्स, घर, स्कूटर — सब सीज़र में आ सकता है
  • एक्सटर्नल फ़ंडिंग रेज़ करना मुश्किल — निवेशक प्रोप्राइटरशिप में निवेश नहीं करते
  • बिज़नेस कंटिन्यूटी नहीं — लीगली आपके साथ बिज़नेस भी ख़त्म
  • बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए क्रेडिबिलिटी कम

किसके लिए बेस्ट: छोटी दुकानें, फ़्रीलांसर्स, इंडिविजुअल सेवा प्रोवाइडर्स, अर्ली-चरण सोलो बिज़नेसेज़। पुष्पा दीदी, ट्यूटर, फ़्रीलांस डिज़ाइनर, छोटा किराना स्टोर।

2. साझेदारी फ़र्म — जब दो या ज़्यादा लोग मिलकर करें

नीमा और ज्योति मिलकर Munsiyari में होमस्टे चलाती हैं। निवेश 60-40 स्प्लिट किया (नीमा की संपत्ति है, ज्योति संचालन मैनेज करती है)। साझेदारी डीड बनवाया जिसमें लिखा है — कौन क्या करेगा, मुनाफ़ा कैसे बँटेगा, और अगर कोई एग्ज़िट करना चाहे तो क्या होगा।

क्या है: दो या ज़्यादा लोग मिलकर बिज़नेस चलाते हैं, मुनाफ़ा और घाटा शेयर करते हैं। Indian Partnership Act, 1932 से गवर्न होता है।

दो तरह का:

  • अनरजिस्टर्ड साझेदारी — ऑपरेट कर सकते हो, लेकिन डिस्प्यूट हो तो साझेदार के ख़िलाफ़ कोर्ट में केस नहीं कर सकते। रेकमेंडेड नहीं।
  • रजिस्टर्ड साझेदारी — स्टेट के रजिस्ट्रार ऑफ़ फ़र्म्स से रजिस्टर। लागत ₹1,000-2,000। टाइम 15-30 दिन।

फ़ायदे:

  • सेटअप आसान — साझेदारी डीड ड्राफ़्ट करो, रजिस्टर करवाओ
  • ज़्यादा कैपिटल — कई साझेदार पैसा पूल करते हैं
  • काम बँट जाता है

नुक़सान:

  • अनलिमिटेड लाइबिलिटी सबके लिए — बिज़नेस नाकाम हो तो हर साझेदार की पर्सनल एसेट्स जोखिम में
  • फ़्लैट 30% टैक्स रेट (प्लस सेस) — छोटे मुनाफ़े के लिए महँगा
  • एक साझेदार कोई कॉन्ट्रैक्ट साइन करे तो बाक़ी सब बाउंड हैं
  • बिना साफ़ डीड के डिस्प्यूट्स बहुत अग्ली हो सकते हैं

साझेदारी डीड में क्या होना चाहिए:

  • सब साझेदार के नाम, एड्रेसेज़
  • बिज़नेस का नेचर
  • हर साझेदार का कैपिटल कंट्रीब्यूशन
  • मुनाफ़ा/घाटा शेयरिंग रेशियो
  • रोल्स और ज़िम्मेदारीज़
  • नया साझेदार ऐड करना या किसी को हटाने के नियम
  • डेथ या रिटायरमेंट पर क्या होगा
  • डिस्प्यूट रेज़ोल्यूशन मेकैनिज़्म

किसके लिए बेस्ट: फ़ैमिली बिज़नेसेज़, पेशेवर फ़र्म्स (CA, लॉयर), बिज़नेसेज़ जहाँ दो लोग कॉम्प्लिमेंट्री हुनर लाते हैं। नीमा-ज्योति का होमस्टे।

3. लिमिटेड लाइबिलिटी साझेदारी (LLP)

क्या है: साझेदारी और कंपनी का हाइब्रिड। साझेदार को साझेदारी जैसा फ़्लेक्सिबिलिटी मिलता है लेकिन लिमिटेड लाइबिलिटी — पर्सनल एसेट्स सुरक्षितेड।

की फ़ीचर्स:

  • MCA (Ministry of Corporate Affairs) से रजिस्टर — mca.gov.in
  • हर साझेदार की लाइबिलिटी सिर्फ़ उसके कैपिटल कंट्रीब्यूशन तक
  • मिनिमम 2 साझेदार, कोई मैक्सिमम नहीं
  • कम से कम 2 डेज़िगनेटेड साझेदार ज़रूरी (सीधार्स जैसे)
  • DPIN और डिजिटल सिगनेचर सर्टिफ़िकेट चाहिए

रजिस्ट्रेशन लागत: ₹3,000-8,000 (गवर्नमेंट फ़ीस + पेशेवर चार्जेज़)

एनुअल कम्प्लायंस:

  • एनुअल रिटर्न (Form 11) — 30 मई तक
  • स्टेटमेंट ऑफ़ अकाउंट & हलेंसी (Form 8) — 30 अक्टूबर तक
  • आमदनी टैक्स रिटर्न फ़ाइलिंग
  • टर्नओवर ₹40 लाख (गुड्स) या ₹10 लाख (सेवाएँ) से ज़्यादा हो तो ऑडिट ज़रूरी

टैक्स: फ़्लैट 30% + सेस।

किसके लिए बेस्ट: पेशेवर सेवाएँ, कंसल्टेंसीज़, बिज़नेसेज़ जहाँ साझेदार लिमिटेड लाइबिलिटी चाहते हैं बिना कंपनी जैसी हेवी कम्प्लायंस के।

4. वन पर्सन कंपनी (OPC)

क्या है: एक ही पर्सन वाली कंपनी। 2013 में इंट्रोड्यूस हुई ताकि सोलो आंत्रप्रेन्योर्स को लिमिटेड लाइबिलिटी का फ़ायदा मिले।

की फ़ीचर्स:

  • सिर्फ़ एक पर्सन काफ़ी — लेकिन एक नॉमिनी नॉमिनेट करना ज़रूरी
  • लिमिटेड लाइबिलिटी — पर्सनल एसेट्स सुरक्षितेड
  • MCA से रजिस्टर्ड
  • एनुअल कम्प्लायंस: बोर्ड मीटिंग्स, एनुअल रिटर्न, फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स, आमदनी टैक्स रिटर्न

रजिस्ट्रेशन लागत: ₹5,000-10,000

टैक्स: 25% (प्लस सरचार्ज और सेस)

थ्रेशोल्ड: टर्नओवर ₹2 करोड़ या पेड-अप कैपिटल ₹50 लाख क्रॉस करे तो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कन्वर्ट करना ज़रूरी।

किसके लिए बेस्ट: सोलो आंत्रप्रेन्योर्स जो लिमिटेड लाइबिलिटी चाहते हैं लेकिन साझेदार नहीं। एक फ़ाउंडर जो उत्पाद बिज़नेस शुरू कर रहा है।

5. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी

प्रिया ने अपने एग्री-टेक ऐप को डे 1 से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाया। उसे पता था कि एंजल निवेशक और VCs से फ़ंडिंग रेज़ करनी होगी, और निवेशक Pvt Ltd कंपनी के अलावा कहीं निवेश नहीं करते। इन्कॉर्पोरेट करने में ₹12,000 लगे, और कम्प्लायंस का ख़र्चा ₹30,000-50,000 पर ईयर (CA फ़ीस)। लेकिन जब ₹40 लाख का सीड राउंड रेज़ किया, लीगल स्ट्रक्चर पहले से तैयार था।

क्या है: एक अलग लीगल एंटिटी — ओनर्स से अलग। शेयरहोल्डर्स कंपनी के ओनर हैं, सीधार्स सँभालते हैं। Companies Act, 2013 से गवर्न।

की फ़ीचर्स:

  • मिनिमम 2 सीधार्स, 2 शेयरहोल्डर्स (एक ही लोग हो सकते हैं)
  • शेयर्स पब्लिकली ट्रेड नहीं हो सकतीं
  • लिमिटेड लाइबिलिटी — शेयरहोल्डर्स सिर्फ़ शेयर कैपिटल तक लाएबल
  • परपेचुअल एग्ज़िस्टेंस — फ़ाउंडर्स चले जाएँ या ना रहें, कंपनी चलती रहती है
  • निवेशक से इक्विटी फ़ंडिंग रेज़ कर सकते हैं

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया:

  1. DSC (डिजिटल सिगनेचर सर्टिफ़िकेट) बनवाओ सब सीधार्स के लिए — ₹1,500-2,000 पर पर्सन
  2. DIN (सीधार आइडेंटिफ़िकेशन नम्बर) — फ़्री, SPICe+ फ़ॉर्म से
  3. कंपनी नेम रिज़र्व करो RUN सेवा से
  4. SPICe+ फ़ॉर्म फ़ाइल करो MCA पोर्टल पर — MOA और AOA शामिल
  5. सर्टिफ़िकेट ऑफ़ इन्कॉर्पोरेशन मिलेगा — 7-15 दिन

कुल लागत: ₹8,000-15,000 (गवर्नमेंट फ़ीस + पेशेवर चार्जेज़)

एनुअल कम्प्लायंस (नॉन-नेगोशिएबल):

  • साल में कम से कम 4 बोर्ड मीटिंग्स
  • AGM (एनुअल जनरल मीटिंग) फ़ाइनेंशियल ईयर एंड के 6 महीने के अंदर
  • एनुअल रिटर्न (AOC-4 और MGT-7) MCA को फ़ाइल
  • आमदनी टैक्स रिटर्न
  • स्टेट्यूटरी ऑडिट बाय CA (अनिवार्य — टर्नओवर चाहे कुछ भी हो)
  • इवेंट-बेस्ड फ़ाइलिंग्स (सीधार बदलाव, एड्रेस बदलाव, आदि)

कम्प्लायंस लागत: ₹30,000-60,000 पर ईयर (CA + CS फ़ीस)

टैक्स: 25% + सरचार्ज और सेस

किसके लिए बेस्ट: निवेश रेज़ करने वाले बिज़नेसेज़, हाई-बढ़त स्टार्टअप्स, स्ट्रॉंग क्रेडिबिलिटी चाहिए जहाँ। प्रिया का एग्री-टेक ऐप।

6. सेक्शन 8 कंपनी (नॉन-मुनाफ़ा)

क्या है: चैरिटेबल पर्पज़ — एजुकेशन, आर्ट, साइंस, हेल्थ, सोशल वेलफ़ेयर — के लिए बनी कंपनी। मुनाफ़ा मेंबर्स में डिस्ट्रीब्यूट नहीं किया जा सकता।

किसके लिए बेस्ट: NGOs, सोशल एंटरप्राइज़ेज़, समुदाय डेवलपमेंट ऑर्गेनाइज़ेशन्स।

7. कोऑपरेटिव सोसाइटी

क्या है: लोगों का ग्रुप जो वॉलंटरिली मिलकर आम इकोनॉमिक ज़रूरतें पूरी करते हैं।

उत्तराखंड में रेलेवेंट: एप्पल फ़ार्मर्स का कोऑपरेटिव, डेयरी कोऑपरेटिव, सँभालनाूम कोऑपरेटिव। अगर रावत जी और बाक़ी एप्पल फ़ार्मर्स कोल्ड स्टोरेज और सीधा मार्केटिंग के लिए रिसोर्सेज़ पूल करना चाहें तो कोऑपरेटिव आइडियल है।

कम्पेरिज़न टेबल

फ़ीचरसोल प्रोप्राइटरसाझेदारीLLPOPCPvt Ltdसेक्शन 8
मिन. लोग122122
लाइबिलिटीअनलिमिटेडअनलिमिटेडलिमिटेडलिमिटेडलिमिटेडलिमिटेड
रजिस्ट्रेशनMCA से नहींरजिस्ट्रार ऑफ़ फ़र्म्सMCAMCAMCAMCA + गवर्नमेंट लाइसेंस
सेटअप लागत₹500-2,000₹1,000-3,000₹3,000-8,000₹5,000-10,000₹8,000-15,000₹15,000-25,000
एनुअल लागतमिनिमल₹5,000-10,000₹10,000-25,000₹15,000-30,000₹30,000-60,000₹30,000-60,000
टैक्स रेटइंडिविजुअल स्लैब्स30% फ़्लैट30% फ़्लैट25%25%एग्ज़ेम्प्ट (12A)
VC फ़ंडिंग?नहींनहींमुश्किलनहींहाँनहीं
बेस्ट फ़ॉरसोलो, छोटाफ़ैमिली, पेशेवरकंसल्टेंसीसोलो + लाइबिलिटीबढ़त, फ़ंडिंगसोशल, चैरिटी

भंडारी अंकल कहते हैं: "मैंने 22 साल प्रोप्राइटरशिप में हार्डवेयर की दुकान चलाई। आसान है। लेकिन अगर बेटा एक्सपैंड करके दूसरी ब्रांच खोलना चाहे, तो शायद LLP रजिस्टर करवाएँगे। स्टेक्स बड़ी हों तो लिमिटेड लाइबिलिटी मायने रखती है।"


ज़रूरी रजिस्ट्रेशन्स — हर बिज़नेस को चाहिए

बिज़नेस टाइप कोई भी हो, कुछ रजिस्ट्रेशन्स लगभग हर किसी को करवानी पड़ती हैं।

1. PAN कार्ड (बिज़नेस के लिए)

क्या: परमानेंट अकाउंट नम्बर — बिज़नेस की टैक्स आइडेंटिटी।

किसको चाहिए: सबको। सोल प्रोप्राइटर हैं तो पर्सनल PAN काम करता है। साझेदारी, LLP, कंपनी में एंटिटी का अलग PAN चाहिए।

कैसे मिलेगा:

  • ऑनलाइन लागू करो onlineservices.nsdl.com या utiitsl.com पर
  • फ़ी: ₹107 (GST इनक्लूसिव)
  • डॉक्यूमेंट्स: आइडेंटिटी प्रूफ़, एड्रेस प्रूफ़, डेट ऑफ़ बर्थ प्रूफ़
  • टाइमलाइन: 15-20 दिन

कंपनीज़/LLPs के लिए: SPICe+ फ़ॉर्म में इन्कॉर्पोरेट करते टाइम PAN ऑटोमेटिकली अलॉट हो जाता है।

2. GST रजिस्ट्रेशन

क्या: गुड्स एंड सेवाएँ टैक्स रजिस्ट्रेशन — 15-डिजिट GSTIN मिलता है।

कब अनिवार्य है?

  • एनुअल टर्नओवर ₹40 लाख से ज़्यादा (गुड्स — उत्तराखंड जैसे स्पेशल श्रेणी स्टेट्स में ₹20 लाख)
  • एनुअल टर्नओवर ₹20 लाख से ज़्यादा (सेवाएँ — स्पेशल श्रेणी स्टेट्स में ₹10 लाख)
  • इंटर-स्टेट सेल करते हो (₹1 की भी इंटर-स्टेट सेल हो तो GST रजिस्ट्रेशन ज़रूरी)
  • ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म्स पर सेल करते हो (Amazon, Flipkart, अपनी वेबसाइट)

अंकिता के लिए ये क्रिटिकल था — वो ऑनलाइन अक्रॉस India सेल करती है। डे 1 से GST रजिस्ट्रेशन ज़रूरी था, टर्नओवर चाहे कुछ भी हो।

वॉलंटरी रजिस्ट्रेशन: थ्रेशोल्ड से नीचे भी रजिस्टर करवा सकते हो। फ़ायदे:

  • परचेजेज़ पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम कर सकते हो
  • बड़ी बिज़नेसेज़ GST-रजिस्टर्ड आपूर्तिकर्ता से डील प्रेफ़र करती हैं
  • क्रेडिबिलिटी बढ़ती है

कैसे रजिस्टर करें:

  1. gst.gov.in पर जाओ
  2. "New Registration" क्लिक करो
  3. पार्ट A भरो: स्टेट, PAN, ईमेल, मोबाइल
  4. TRN (टेम्परेरी रेफ़रेंस नम्बर) मिलेगा
  5. पार्ट B भरो: बिज़नेस ब्योरा, बैंक अकाउंट, डॉक्यूमेंट्स अपलोड
  6. डॉक्यूमेंट्स: PAN, आधार, बिज़नेस एड्रेस प्रूफ़, बैंक स्टेटमेंट, फ़ोटोग्राफ़
  7. आधार ऑथेंटिकेशन कम्प्लीट करो
  8. GSTIN 7 वर्किंग डेज़ में इश्यू (इस्तेमालुअली 3-5 दिन)

लागत: फ़्री। GST रजिस्ट्रेशन की कोई गवर्नमेंट फ़ी नहीं।

कम्पोज़िशन स्कीम: टर्नओवर ₹1.5 करोड़ तक है तो कम्पोज़िशन स्कीम ऑप्ट कर सकते हो — फ़्लैट 1% (मैन्युफ़ैक्चरर्स/ट्रेडर्स) या 6% (रेस्टोरेंट्स/सेवा प्रोवाइडर्स)। मंथली की जगह क्वार्टरली फ़ाइलिंग। लेकिन ITC क्लेम नहीं कर सकते और इंटर-स्टेट सेल नहीं कर सकते।

3. उद्यम रजिस्ट्रेशन (MSME रजिस्ट्रेशन)

क्या: गवर्नमेंट की रजिस्ट्री — माइक्रो, स्मॉल, और मीडियम एंटरप्राइज़ेज़ के लिए।

ये करवाना ज़रूर चाहिए क्योंकि: ये फ़्री है और फ़ायदे की लिस्ट बहुत लम्बी है:

  • बैंक्स से प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (लोन्स आसानी से)
  • लोन्स पर लोअर इंटरेस्ट रेट्स
  • CGTMSE स्कीम में कोलैटरल-फ़्री लोन (₹5 करोड़ तक)
  • डिलेड पेमेंट्स से सुरक्षा
  • पेटेंट/ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन पर सब्सिडी
  • गवर्नमेंट टेंडर्स के लिए एलिजिबिलिटी (कुछ MSMEs के लिए रिज़र्व्ड)
  • PMEGP, स्टैंड-अप India जैसी स्कीम्स

क्लासिफ़िकेशन:

श्रेणीनिवेशटर्नओवर
माइक्रो₹1 करोड़ तक₹5 करोड़ तक
स्मॉल₹10 करोड़ तक₹50 करोड़ तक
मीडियम₹50 करोड़ तक₹250 करोड़ तक

कैसे रजिस्टर करें:

  1. udyamregistration.gov.in पर जाओ
  2. आधार नम्बर और नाम एंटर करो
  3. OTP से वैलिडेट करो
  4. बिज़नेस ब्योरा, PAN, बैंक अकाउंट, एक्टिविटी टाइप भरो
  5. सबमिट — उद्यम रजिस्ट्रेशन नम्बर तुरंत मिल जाएगा

लागत: बिल्कुल फ़्री। किसी एजेंट को पैसे मत दो। 10 मिनट में ख़ुद कर लो।

पुष्पा दीदी ने उद्यम रजिस्ट्रेशन ऋषिकेश के डिस्ट्रिक्ट उद्योगों सेंटर (DIC) में जाकर करवाया। वहाँ का दफ़्तरर ने ऑनलाइन फ़ॉर्म भरने में मदद की। 15 मिनट लगे। अब माइक्रो एंटरप्राइज़ वर्गीकृत हैं, जिससे PMEGP में ₹2 लाख का लोन सब्सिडाइज़्ड इंटरेस्ट पर मिला।

4. शॉप & एस्टेबलिशमेंट रजिस्ट्रेशन

क्या: हर शॉप, कमर्शियल एस्टेबलिशमेंट, रेस्टोरेंट, या दफ़्तर को शॉप्स एंड एस्टेबलिशमेंट्स एक्ट के तहत रजिस्टर करना ज़रूरी है। उत्तराखंड में ये उत्तराखंड शॉप्स एंड कमर्शियल एस्टेबलिशमेंट्स एक्ट है।

कैसे मिलेगा:

  • लोकल म्यूनिसिपल बॉडी (नगर पालिका / नगर निगम / पंचायत) से लागू
  • डॉक्यूमेंट्स: ID प्रूफ़, प्रेमाइसेज़ एड्रेस प्रूफ़, रेंटल समझौता (रेंट पर हो तो), फ़ोटोग्राफ़्स
  • फ़ी: ₹200-1,000
  • टाइमलाइन: 7-15 दिन
  • एनुअली रिन्यू होता है

क्यों ज़रूरी: करंट अकाउंट खोलने, GST लागू करने, बाक़ी लाइसेंसेज़ लेने में — सबमें ये बुनियादी प्रूफ़ चाहिए कि बिज़नेस फ़िज़िकली कहाँ है।

5. ट्रेड लाइसेंस

क्या: लोकल म्यूनिसिपल बॉडी से अनुमति कि आप पर्टिकुलर जगह पर पर्टिकुलर ट्रेड/बिज़नेस कर सकते हैं।

शॉप & एस्टेबलिशमेंट से अलग? हाँ। शॉप & एस्टेबलिशमेंट वर्कप्लेस कंडीशन्स (एम्प्लॉई आवर्स, आदि) के बारे में है। ट्रेड लाइसेंस क्या काम करते हो — ये एनश्योर करता है कि उस ज़ोन में वो बिज़नेस अलाउड है।

कैसे मिलेगा:

  • म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन / नगर पालिका से लागू
  • फ़ी: ₹500-5,000 (बिज़नेस नेचर और साइज़ पर निर्भर)
  • एनुअली रिन्यू
  • 15-30 दिन में प्रक्रिया

सेक्टर-ख़ास लाइसेंसेज़ — अपने बिज़नेस टाइप के हिसाब से

फ़ूड बिज़नेस — FSSAI लाइसेंस

अगर आप फ़ूड बनाते, बेचते, स्टोर करते, डिस्ट्रीब्यूट करते, या ट्रांसपोर्ट करते हो — किसी भी फ़ॉर्म में — FSSAI लाइसेंस चाहिए। कोई एक्सेप्शन नहीं।

तीन टाइप्स:

टाइपकिसके लिएएनुअल टर्नओवरफ़ीअथॉरिटी
बुनियादी रजिस्ट्रेशनछोटे फ़ूड बिज़नेसेज़, हॉकर्स, टेम्परेरी स्टॉल्स₹12 लाख तक₹100/ईयरस्टेट
स्टेट लाइसेंसमीडियम बिज़नेसेज़, मैन्युफ़ैक्चरर्स, रेस्टोरेंट्स, कैटरर्स₹12 लाख - ₹20 करोड़₹2,000-5,000/ईयरस्टेट
सेंट्रल लाइसेंसबड़े मैन्युफ़ैक्चरर्स, इम्पोर्टर्स, मल्टी-स्टेट संचालन₹20 करोड़ से ऊपर₹7,500/ईयरसेंट्रल

अंकिता का केस: शुरू में बुनियादी रजिस्ट्रेशन (₹100/ईयर) ली जब टर्नओवर कम था। लेकिन ₹12 लाख एनुअल टर्नओवर क्रॉस करते ही और इंटर-स्टेट शिपिंग शुरू करते ही, स्टेट लाइसेंस लेना ज़रूरी था। हर उत्पाद लेबल पर वैलिड 14-डिजिट लाइसेंस नम्बर डिस्प्ले करना ज़रूरी था।

कैसे लागू करें:

  1. foscos.fssai.gov.in पर जाओ
  2. अकाउंट बनाओ, लॉग इन करो
  3. अप्रोप्रिएट लाइसेंस टाइप चूज़ करो
  4. एप्लिकेशन फ़ॉर्म भरो — बिज़नेस ब्योरा, फ़ूड श्रेणी, प्रोडक्शन कैपेसिटी
  5. डॉक्यूमेंट्स अपलोड: फ़ोटो, ID प्रूफ़, एड्रेस प्रूफ़, फ़ूड सेफ़्टी प्रबंधन प्लान
  6. फ़ी ऑनलाइन पे करो
  7. बुनियादी रजिस्ट्रेशन: 7 दिन में अप्रूवल (ऑफ़्टन इंस्टेंट)
  8. स्टेट लाइसेंस: इंस्पेक्शन लग सकती है, 30-60 दिन
  9. सेंट्रल लाइसेंस: इंस्पेक्शन ज़रूरी, 60 दिन

रिन्यूअल: एक्सपायरी डेट से पहले करना ज़रूरी। 1 साल पहले तक रिन्यू कर सकते हो। लेट रिन्यूअल पर पेनल्टी ₹100 पर डे।

ईटिंग हाउस लाइसेंस: रेस्टोरेंट, ढाबा, या कोई जगह जहाँ लोग आकर खाते हैं — वहाँ लोकल पुलिस से ईटिंग हाउस लाइसेंस भी चाहिए। FSSAI से अलग। पुलिस वेरिफ़िकेशन होती है प्रेमाइसेज़ और ओनर की।

होमस्टे/टूरिज़्म — नीमा और ज्योति की रिक्वायरमेंट्स

नीमा और ज्योति को सरप्राइज़ हुआ कि होमस्टे के लिए कितनी अनुमति्स चाहिए। "हमने सोचा बस रूम्स क्लीन करो और Airbnb पर लिस्ट कर दो," ज्योति बोली। "पता चला पूरी चेकलिस्ट है।"

ज़रूरी रजिस्ट्रेशन्स:

  1. उत्तराखंड टूरिज़्म डिपार्टमेंट रजिस्ट्रेशन

    • डिस्ट्रिक्ट टूरिज़्म दफ़्तर या ऑनलाइन लागू — uttarakhandtourism.gov.in
    • फ़ी: ₹500-1,000
    • फ़ायदे: स्टेट टूरिज़्म पोर्टल पर लिस्टिंग, टूरिज़्म सब्सिडीज़, ऑफ़िशियल रेकग्निशन
  2. म्यूनिसिपल NOC

    • लोकल नगर पंचायत / ग्राम पंचायत से
    • संपत्ति कमर्शियल/टूरिज़्म इस्तेमाल के लिए अलाउड है — पुष्टि
    • फ़ी: ₹500-2,000
  3. फ़ायर सेफ़्टी सर्टिफ़िकेट

    • फ़ायर डिपार्टमेंट से
    • गेस्ट अकॉमोडेशन वाली हर एस्टेबलिशमेंट के लिए अनिवार्य
    • बुनियादी इक्विपमेंट ज़रूरी: फ़ायर एक्सटिंगुइशर्स, स्मोक डिटेक्टर्स, इमरजेंसी एग्ज़िट्स
    • फ़ी: ₹1,000-5,000
  4. पुलिस रजिस्ट्रेशन

    • सब होटल्स/होमचरण़ को गेस्ट्स रजिस्टर करने होते हैं लोकल पुलिस में (फ़ॉरेन गेस्ट्स के लिए Form C)
    • उत्तराखंड में अब डिजिटली SAATHI पोर्टल से
  5. GST रजिस्ट्रेशन — टर्नओवर थ्रेशोल्ड क्रॉस करे तो

  6. शॉप & एस्टेबलिशमेंट लाइसेंस

एग्रीकल्चर — रावत जी के लाइसेंसेज़

फ़्रेश प्रोड्यूस बेचने के लिए:

  • APMC/मंडी लाइसेंस — मंडी से बेचते हो तो। फ़ी: ₹200-500/ईयर
  • सीधा सेल: रीसेंट रिफ़ॉर्म्स में फ़ार्मर्स सीधे बायर्स, FPOs, या e-NAM से सेल कर सकते हैं

प्रक्रिया्ड फ़ूड (जूस, अचार, जैम) के लिए:

  • FSSAI लाइसेंस — अनिवार्य
  • BIS सर्टिफ़िकेशन — सर्टेन श्रेणियाँ में
  • पैकेजिंग एंड लेबलिंग कम्प्लायंस

ऑर्गेनिक सर्टिफ़िकेशन के लिए:

  • PGS (पार्टिसिपेटरी गारंटी सिस्टम) — ग्रुप सर्टिफ़िकेशन, स्मॉल फ़ार्मर्स के लिए आसान और सस्ता। pgsindia-ncof.gov.in पर। फ़्री।
  • थर्ड-पार्टी सर्टिफ़िकेशन — एक्सपोर्ट के लिए ज़्यादा क्रेडिबल, लागत ₹30,000-1 लाख/ईयर

रावत जी Ranikhet में 35 एप्पल फ़ार्मर्स के FPO (फ़ार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइज़ेशन) में हैं। FPO ने ग्रुप में PGS ऑर्गेनिक सर्टिफ़िकेशन ली — हर फ़ार्मर का ख़र्चा ₹1,000 से कम पड़ा। अब "PGS ऑर्गेनिक" लेबल के साथ सेब बेचते हैं और 20-30% प्रीमियम मिलता है।

मैन्युफ़ैक्चरिंग — कारख़ाना लाइसेंस और पोल्यूशन कंट्रोल

मैन्युफ़ैक्चरिंग यूनिट सेट अप करो — छोटी भी हो तो:

  1. कारख़ाना लाइसेंस — Factories Act, 1948 के तहत। 10+ वर्कर्स (पावर के साथ) या 20+ वर्कर्स (बिना पावर) हों तो ज़रूरी।

    • स्टेट लेबर डिपार्टमेंट से लागू
    • फ़ी: ₹500-5,000 (वर्कर्स की संख्या पर बेस्ड)
    • एनुअली रिन्यू
  2. पोल्यूशन कंट्रोल NOC — उत्तराखंड पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (UKPCB) से

    • कंसेंट टू एस्टेबलिश (CTE) — यूनिट लगाने से पहले
    • कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) — सेटअप के बाद, प्रोडक्शन शुरू करने से पहले
    • फ़ी: ₹5,000-25,000
    • ueppcb.uk.gov.in पर लागू
  3. BIS सर्टिफ़िकेशन — अनिवार्य BIS स्टैंडर्ड्स वाले उत्पाद के लिए

  4. लीगल मेट्रोलॉजी — पैकेज्ड गुड्स बेचते हो तो MRP, नेट वेट, मैन्युफ़ैक्चरर ब्योरा डिक्लेयर करने ज़रूरी

टेक्नोलॉजी — प्रिया का स्टार्टअप रजिस्ट्रेशन

प्रिया ने स्टार्टअप India इनिशिएटिव में रजिस्टर किया। "DPIIT रेकग्निशन ईयर 1 में मेरा सबसे उपयोगी काम था," वो बोलती है। "टैक्स हॉलिडे मिली, लेबर लॉज़ के लिए सेल्फ़-सर्टिफ़िकेशन, और सबसे ज़रूरी — निवेशक से बात करते टाइम क्रेडिबिलिटी।"

स्टार्टअप India / DPIIT रेकग्निशन:

एलिजिबिलिटी:

  • Pvt Ltd कंपनी, LLP, या साझेदारी फ़र्म
  • एंटिटी 10 साल से कम पुरानी
  • किसी भी FY में टर्नओवर ₹100 करोड़ से ज़्यादा नहीं
  • इनोवेशन, डेवलपमेंट, या सुधार पर काम

कैसे लागू करें:

  1. startupindia.gov.in पर जाओ
  2. रजिस्टर करो, अकाउंट बनाओ
  3. DPIIT रेकग्निशन के लिए लागू
  4. डॉक्यूमेंट्स अपलोड: सर्टिफ़िकेट ऑफ़ इन्कॉर्पोरेशन, बिज़नेस डिस्क्रिप्शन
  5. रेकग्निशन इस्तेमालुअली 2-5 वर्किंग डेज़ में

DPIIT रेकग्निशन के फ़ायदे:

  • टैक्स हॉलिडे: पहले 10 साल में से 3 कंसेक्यूटिव साल आमदनी टैक्स एक्ज़ेम्प्शन (सेक्शन 80-IAC)
  • एंजल टैक्स एक्ज़ेम्प्शन
  • सेल्फ़-सर्टिफ़िकेशन 6 लेबर लॉज़ और 3 एनवायरनमेंटल लॉज़ के लिए
  • फ़ास्ट-ट्रैक पेटेंट (80% रिबेट ऑन फ़ाइलिंग फ़ी)
  • ईज़ी वाइंडिंग अप — 90 दिन में कंपनी बंद (आम तौर पर बहुत लम्बा प्रक्रिया)
  • गवर्नमेंट टेंडर्स एक्सेस बिना प्रायर अनुभव
  • फ़ंड ऑफ़ फ़ंड्स एक्सेस (₹10,000 करोड़ कॉर्पस)

इंटलेक्चुअल संपत्ति: जो बनाया है उसे बचाो

ट्रेडमार्क — ब्रांड नेम सुरक्षा

अंकिता ने 2 साल "पहाड़ी ज़ायका" ब्रांड बनाने में लगाए। फिर पता चला कि Lucknow में कोई एग्ज़ैक्टली सेम नाम से सस्ता अचार बेच रहा है। Amazon पर। सिमिलर लोगो के साथ। बहुत ग़ुस्सा आया — लेकिन बिना रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क, क्विकली कुछ कर नहीं सकती थी। 8 महीने लगे लीगल फ़ाइट में। अगर पहले ट्रेडमार्क रजिस्टर करवा लेती, तो लॉ-बैक्ड सीज़-एंड-डेसिस्ट लेटर भेज सकती थी।

ट्रेडमार्क क्या बचाता है: ब्रांड नेम, लोगो, टैगलाइन, या कोई भी डिस्टिंक्टिव मार्क जो बिज़नेस आइडेंटिफ़ाई करे।

रजिस्टर कैसे करें:

  1. सर्च पहलेipindia.gov.in पर ट्रेडमार्क सर्च टूल इस्तेमाल करो कि डिज़ायर्ड नेम पहले से टेकन तो नहीं
  2. क्लास चूज़ करो — 45 क्लासेज़ हैं (जैसे, क्लास 29: पैकेज्ड फ़ूड, क्लास 30: स्पाइसेज़, क्लास 43: रेस्टोरेंट्स/होटल्स)
  3. एप्लिकेशन फ़ाइल करो ipindiaonline.gov.in पर
    • गवर्नमेंट फ़ी: ₹4,500 पर क्लास (MSMEs/स्टार्टअप्स उद्यम/DPIIT रेकग्निशन के साथ)
  4. एग्ज़ामिनेशन — 1-3 मंथ्स में एग्ज़ामिनर समीक्षा करता है
  5. ट्रेडमार्क जर्नल में पब्लिश — 4 मंथ्स कोई ऑपोज़ कर सकता है
  6. रजिस्ट्रेशन — ऑपोज़िशन नहीं हुआ तो सर्टिफ़िकेट मिलता है
  7. कुल टाइमलाइन: 8-12 मंथ्स (अगर ऑपोज़िशन नहीं)
  8. वैलिडिटी: 10 साल, इंडेफ़िनिटली रिन्यूएबल

लागत: गवर्नमेंट फ़ी ₹4,500 पर क्लास + एजेंट/लॉयर ₹2,000-5,000 = ₹6,500-10,000 पर क्लास

कॉपीराइट

क्या बचाता है: ओरिजिनल लिटरेरी, आर्टिस्टिक, म्इस्तेमालिकल वर्क्स। सॉफ़्टवेयर कोड, डेटाबेसेज़, क्रिएटिव कंटेंट भी।

रेलेवेंट: अंकिता की उत्पाद फ़ोटोग्राफ़ी, रेसिपी बुकलेट्स। प्रिया का सॉफ़्टवेयर कोड।

ज़रूरी बात: कॉपीराइट क्रिएशन पर ऑटोमेटिकली एग्ज़िस्ट करता है। रजिस्ट्रेशन ज़रूरी नहीं है — लेकिन कोर्ट में काम आता है।

रजिस्ट्रेशन: copyright.gov.in पर। फ़ी: ₹500-5,000। 2-4 मंथ्स लगते हैं।

पेटेंट

क्या बचाता है: न्यू इन्वेंशन्स — नॉवल, नॉन-ज़ाहिर, उपयोगी।

लागत: ₹1,600 (इंडिविजुअल्स/स्टार्टअप्स, रिबेट के साथ)। प्लस अटॉर्नी फ़ीस ₹20,000-50,000+। प्रक्रिया 2-4 साल।

व्यावहारिक एडवाइस: ज़्यादातर स्मॉल बिज़नेसेज़ को पेटेंट की ज़रूरत नहीं। ट्रेडमार्क ज़्यादा रेलेवेंट है। पहले ट्रेडमार्क पर ध्यान करो।


कॉन्ट्रैक्ट्स और समझौते

हैंडशेक समझौता कोर्ट में काम नहीं आता। हर ज़रूरी बिज़नेस रिश्ता लिखित में होनी चाहिए।

साझेदारी डीड

कंटेंट ऊपर कवर किया। लॉयर से ड्राफ़्ट करवाओ, रजिस्ट्रार ऑफ़ फ़र्म्स से रजिस्टर। लागत: ₹5,000-15,000 (स्टैम्प ड्यूटी + लॉयर फ़ीस)।

रेंटल / लीज़ समझौता

भंडारी अंकल की Haldwani की दुकान 22 साल से रेंट पर है। पहले 15 साल वर्बल समझौता पर चलाई। "फिर कभी नहीं," वो बोलते हैं। "जब पुराने मकान मालिक गुज़रे, उनके बेटे ने क्लेम किया कि रेंट ₹5,000 ज़्यादा था। मेरे पास प्रूफ़ नहीं था। मंथ्स लग गए सॉर्ट आउट करने में।"

समझौता में क्या होना चाहिए:

  • लैंडलॉर्ड और टेनेंट की ब्योरा
  • संपत्ति डिस्क्रिप्शन और एड्रेस
  • मंथली रेंट और सिक्योरिटी डिपॉज़िट
  • रेंट एस्कलेशन क्लॉज़ (इस्तेमालुअली 5-10% पर ईयर)
  • ड्यूरेशन
  • लॉक-इन पीरियड
  • बनाए रखेंस ज़िम्मेदारीज़
  • टर्मिनेशन और नोटिस पीरियड
  • फ़िक्स्चर्स और सुधार्स का क्या होगा जब छोड़ें

रजिस्ट्रेशन: 11 मंथ्स से ज़्यादा के लीज़ को सब-रजिस्ट्रार से रजिस्टर करवाना ज़रूरी है। उत्तराखंड में स्टैम्प ड्यूटी 2-5%। अनरजिस्टर्ड लीज़ 11 मंथ्स से ज़्यादा का कोर्ट में एडमिसिबल नहीं।

एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट

अगर कोई भी हायर करते हो — एक भी एम्प्लॉई — लिखित में रखो:

  • जॉब टाइटल और ज़िम्मेदारीज़
  • तनख़्वाह, पेमेंट शेड्यूल, कम्पोनेंट्स
  • वर्किंग आवर्स और लीव पॉलिसी
  • नोटिस पीरियड दोनों तरफ़ से
  • कॉन्फ़िडेंशियैलिटी क्लॉज़
  • टर्मिनेशन कंडीशन्स

वेंडर / आपूर्तिकर्ता समझौता

रावत जी 3 ट्रेडर्स को Delhi में सेब भेजते हैं। दो के साथ वर्बल — "भेजूँगा, बेचो, पैसे भेज देना।" तीसरे के साथ रिटन समझौता है: क्वांटिटी, गुणवत्ता स्टैंडर्ड्स, पेमेंट टाइमलाइन (डिलीवरी के 14 दिन में), लेट पेमेंट पेनल्टी, ट्रांज़िट डैमेज किसका। अंदाज़ा लगाओ कौन सा ट्रेडर टाइम पर पे करता है?

फ़्रेंचाइज़ी समझौता

विक्रम का फ़्रेंचाइज़ी समझौता नेशनल फ़ूड चेन के साथ 47 पेजेज़ लम्बा है। "मैंने लॉयर से हर लाइन पढ़वाई," वो बोलता है। "अच्छा किया। एक क्लॉज़ था कि वो 30 दिन की नोटिस से किसी भी वजह से फ़्रेंचाइज़ी टर्मिनेट कर सकते हैं। मेरे लॉयर ने 90 दिन विद ख़ास ग्राउंड्स करवाया। वो एक बदलाव कभी मेरे पूरे ₹18 लाख निवेश को बचा सकता है।"

फ़्रेंचाइज़ी समझौता में वॉच करने वाले क्लॉज़ेज़:

  • फ़्रेंचाइज़ी फ़ी और ऑनगोइंग रॉयल्टी %
  • टेरिटरी एक्सक्लूसिविटी — नियरबाई दूसरा फ़्रेंचाइज़ी खोल सकते हैं क्या?
  • टर्म और रिन्यूअल कंडीशन्स
  • प्रशिक्षण और सपोर्ट ऑब्लिगेशन्स
  • एग्ज़िट कंडीशन्स
  • नॉन-मुक़ाबला क्लॉज़
  • रेनोवेशन/अपग्रेड रिक्वायरमेंट्स (और कौन पे करेगा)

लेबर लॉ बुनियादी्स — अगर एम्प्लॉईज़ हैं

EPF (एम्प्लॉईज़ प्रॉविडेंट फ़ंड)

  • अनिवार्य: 20 या ज़्यादा एम्प्लॉईज़ हों तो
  • वॉलंटरी: कम एम्प्लॉईज़ में भी ऑप्ट कर सकते हो
  • कंट्रीब्यूशन: एम्प्लॉयर से 12% + एम्प्लॉई से 12% (बुनियादी तनख़्वाह पर)
  • रजिस्टर: epfindia.gov.in
  • मंथली फ़ाइलिंग: ECR हर महीने 15 तारीख़ तक

ESI (एम्प्लॉईज़ स्टेट इंश्योरेंस)

  • अनिवार्य: 10+ एम्प्लॉईज़ और कोई एम्प्लॉई ₹21,000/मंथ तक कमाता हो
  • कंट्रीब्यूशन: एम्प्लॉयर 3.25% + एम्प्लॉई 0.75%
  • रजिस्टर: esic.gov.in
  • फ़ायदा: मेडिकल केयर, सिकनेस फ़ायदे, मायने्निटी फ़ायदे

मिनिमम वेजेज़

  • हर स्टेट मिनिमम वेजेज़ नोटिफ़ाई करता है
  • उत्तराखंड में (2024-25): अनहुनर्ड वर्कर्स ₹10,000-12,000/मंथ, सेमी-हुनर्ड ₹12,000-15,000
  • नॉन-कम्प्लायंस पेनल्टी: ₹50,000 तक फ़ाइन और/या कैद

शॉप्स & एस्टेबलिशमेंट्स कम्प्लायंस

रजिस्टर करने के बाद कम्प्लाई करना ज़रूरी:

  • वर्किंग आवर्स लिमिट्स (टिपिकली 9 आवर्स/डे, 48 आवर्स/वीक)
  • वीकली हॉलिडे (कम से कम 1 दिन)
  • ओवरटाइम रेट्स (इस्तेमालुअली डबल)
  • लीव पॉलिसी (एनुअल, सिक, कैज़ुअल लीव)
  • रिकॉर्ड बनाए रख करो (अटेंडेंस रजिस्टर, वेज रजिस्टर)
  • रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट शॉप में प्रॉमिनेंटली डिस्प्ले करो

बिज़नेस इंश्योरेंस

ज़्यादातर स्मॉल बिज़नेस ओनर्स लाइफ़ और हेल्थ इंश्योरेंस लेते हैं लेकिन बिज़नेस को पूरा इग्नोर करते हैं। एक फ़ायर, फ़्लड, या घाटाूट — सालों की मेहनत ख़त्म।

फ़ायर इंश्योरेंस

  • प्रेमाइसेज़, स्टॉक, फ़र्नीचर, इक्विपमेंट को फ़ायर डैमेज से कवर
  • किसको चाहिए: फ़िज़िकल प्रेमाइसेज़ वाले सबको। भंडारी अंकल ₹15-20 लाख स्टॉक के साथ? एब्सोल्यूटली।
  • लागत: इंश्योर्ड वैल्यू का 0.05-0.15% पर ईयर। ₹20 लाख कवरेज = ₹1,000-3,000/ईयर
  • ऐड-ऑन्स: अर्थक्वेक, फ़्लड, रायट कवरेज (उत्तराखंड में अर्थक्वेक जोखिम — बहुत रेलेवेंट)

स्टॉक/भंडार इंश्योरेंस

  • भंडार को थेफ़्ट, डैमेज, स्वाभाविक डिज़ास्टर्स से कवर
  • फ़ायर इंश्योरेंस के साथ स्टैंडर्ड फ़ायर एंड स्पेशल पेरिल्स (SFSP) पॉलिसी में बंडल हो सकता है

लाइबिलिटी इंश्योरेंस

  • पब्लिक लाइबिलिटी: ग्राहक प्रेमाइसेज़ पर इंजर्ड हो (नीमा के होमस्टे में गेस्ट फिसले)
  • उत्पाद लाइबिलिटी: उत्पाद से हार्म हो (अंकिता के उत्पाद से एलर्जिक रिएक्शन)
  • लागत: ₹5,000-15,000/ईयर स्मॉल बिज़नेसेज़ के लिए

कीमैन इंश्योरेंस

  • बिज़नेस के की पर्सन पर लाइफ़ इंश्योरेंस — वो पर्सन ना रहे तो बिज़नेस को पेआउट मिले
  • प्रीमियम बिज़नेस ख़र्चा है (टैक्स डिडक्टिबल)

इंश्योरेंस नहीं होने की रियल लागत: 2023 में Haldwani में एक हार्डवेयर शॉप में फ़ायर से ₹8 लाख का स्टॉक जला। इंश्योरेंस नहीं था। ओनर 10 साल तक ₹1,500/ईयर फ़ायर इंश्योरेंस पे करता था, फिर "पैसे बचाने" के लिए बंद कर दिया। कुल सेव्ड: ₹4,500। कुल घाटा्ट: ₹8 लाख।


आम लीगल ग़लतियाँ — और कैसे बचें

1. रजिस्टर ही नहीं करवाना "चलता है, छोटा बिज़नेस है" — सबसे ख़तरनाक एटीट्यूड। नोटिस या पेनल्टी हमेशा कम्प्लायंस से ज़्यादा महँगी होती है।

2. एक्सपायर्ड लाइसेंसेज़ पर ऑपरेट करना अंकिता का FSSAI डिज़ास्टर। एक्सपायरी से 60 दिन पहले कैलेंडर रिमाइंडर सेट करो।

3. बिना रिटन साझेदारी समझौता "हम दोस्त हैं, ट्रस्ट है।" जब तक पैसों पर डिससमझौता नहीं आती। फ़ैमिली साझेदारी्स में भी रिटन डीड ज़रूरी।

4. ऑनलाइन सेल करते टाइम GST रजिस्ट्रेशन इग्नोर करना Amazon, Flipkart, Meesho, अपनी वेबसाइट — अक्रॉस India सेल करते हो तो GST अनिवार्य है, टर्नओवर चाहे कुछ भी हो। साल बाद बैक-टैक्स माँग आती है।

5. पर्सनल और बिज़नेस फ़ाइनेंसेज़ मिक्स करना प्रोप्राइटरशिप में सेम अकाउंट में पर्सनल और बिज़नेस मनी — टैक्स फ़ाइलिंग और लीगल डिस्प्यूट में नाइटमेयर। बिज़नेस के लिए अलग करंट अकाउंट खोलो।

6. किसी और का ब्रांड नेम इस्तेमाल करना "ये नेम अच्छा लगता है, इस्तेमाल कर लेता हूँ।" पहले ट्रेडमार्क रजिस्ट्री चेक करो। बिग ब्रांड के लॉयर से सीज़-एंड-डेसिस्ट लेटर — लाखों का ख़र्चा।

7. कॉन्ट्रैक्ट्स साइन करने से पहले पढ़ना नहीं विक्रम ने हर लाइन पढ़ी। बहुत लोग नहीं पढ़ते। बैड क्लॉज़ सालों तक ट्रैप कर सकता है।

8. कंपनीज़/LLPs की एनुअल कम्प्लायंस इग्नोर करना MCA लेट फ़ाइलिंग पर पेनल्टी लगाता है। सीधार्स डिसक्वालिफ़ाई हो सकते हैं। ₹100-200 पर डे पेनल्टी जल्दी बड़ी हो जाती है।

9. सही रिकॉर्ड बनाए रख नहीं करना हर रिसीट, इनवॉइस, कॉन्ट्रैक्ट, कम्यूनिकेशन सेव करो। लॉ डॉक्यूमेंटेशन देखता है, वर्बल वादे नहीं।

10. ट्रबल होने का वेट करना लॉयर हायर करने के लिए जब अर्जेंटली लॉयर चाहिए, समस्या पहले से महँगा हो चुकी है। सेटअप के टाइम लीगल एडवाइस लो — ये निवेश है, ख़र्चा नहीं।


कम्प्लायंस कैलेंडर

मंथटास्ककिसके लिए
हर महीनेGST रिटर्न (GSTR-1 और GSTR-3B)GST-रजिस्टर्ड बिज़नेसेज़
हर महीनेEPF/ESI पेमेंट और फ़ाइलिंगएम्प्लॉईज़ वाले बिज़नेसेज़
हर क्वार्टरGST रिटर्न (कम्पोज़िशन)कम्पोज़िशन स्कीम
हर क्वार्टरTDS रिटर्नTDS डिडक्ट करने वाले
30 मईLLP एनुअल रिटर्न (Form 11)LLPs
31 जुलाईआमदनी टैक्स रिटर्न (इंडिविजुअल्स)सोल प्रोप्राइटर्स
30 सितम्बरकंपनी एनुअल रिटर्न (MGT-7)कंपनीज़
30 अक्टूबरLLP Form 8LLPs
31 अक्टूबरआमदनी टैक्स रिटर्न (ऑडिट केसेज़)कंपनीज़, ऑडिटेड फ़र्म्स
30 नवम्बरकंपनी फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स (AOC-4)कंपनीज़
एनुअलFSSAI रिन्यूअलफ़ूड बिज़नेसेज़
एनुअलशॉप & एस्टेबलिशमेंट रिन्यूअलसब शॉप्स
एनुअलट्रेड लाइसेंस रिन्यूअलसब बिज़नेसेज़
एनुअलकारख़ाना लाइसेंस रिन्यूअलमैन्युफ़ैक्चरर्स
एनुअलपोल्यूशन कंट्रोल NOC रिन्यूअलमैन्युफ़ैक्चरिंग यूनिट्स

प्रिया की टिप: "मैंने गूगल शीट बनाई — हर कम्प्लायंस डेडलाइन, ड्यू डेट, कौन रिस्पॉन्सिबल है (मैं या CA), और स्टेटस। हर संडे 5 मिनट चेक करती हूँ कि अगले 30 दिन में क्या आ रहा है। मल्टीपल पेनल्टीज़ से बचा चुकी है।"


CA हायर करें या लॉयर?

CA (चार्टर्ड अकाउंटेंट) कब:

  • बिज़नेस रजिस्ट्रेशन (GST, PAN, उद्यम)
  • टैक्स फ़ाइलिंग (आमदनी टैक्स, GST रिटर्न्स)
  • कंपनी इन्कॉर्पोरेशन और MCA फ़ाइलिंग्स
  • बुककीपिंग और अकाउंटिंग
  • टैक्स योजना
  • फ़ाइनेंशियल ऑडिट्स
  • टैक्स नोटिसेज़ का रिप्लाई

लॉयर कब:

  • साझेदारी डीड और MOA/AOA ड्राफ़्टिंग
  • फ़्रेंचाइज़ी समझौते और कॉन्ट्रैक्ट्स समीक्षा
  • ट्रेडमार्क और पेटेंट फ़ाइलिंग
  • संपत्ति लीज़/रेंटल समझौते
  • लेबर लॉ डिस्प्यूट्स
  • कोई भी लीगल नोटिस
  • कोर्ट मायने्स

कंपनी सेक्रेटरी (CS) कब:

  • कंपनी लॉ कम्प्लायंस (बोर्ड मीटिंग्स, मिनट्स, स्टेट्यूटरी फ़ाइलिंग्स)
  • कंपनीज़ के एनुअल रिटर्न्स
  • सीधार्स, रजिस्टर्ड दफ़्तर, कैपिटल स्ट्रक्चर बदलाव

लागत गाइड:

पेशेवरटिपिकल फ़ी (स्मॉल बिज़नेस)कब हायर करें
CA₹10,000-30,000/ईयर (रिटेनर)डे 1 अगर GST/टैक्स है
लॉयर₹5,000-20,000 पर मायनेज़रूरत पड़े तब (कॉन्ट्रैक्ट्स, डिस्प्यूट्स)
CS₹15,000-30,000/ईयरसिर्फ़ कंपनी/LLP हो तो

भंडारी अंकल की सीख: "15 साल एक ही CA इस्तेमाल किया — बस नियरबाई था और सस्ता। रिटर्न्स फ़ाइल करता था, लेकिन उद्यम रजिस्ट्रेशन कभी नहीं बताया, प्रिज़म्प्टिव स्कीम नहीं बताया, इंश्योरेंस समीक्षा नहीं किया। जब एक यंग CA को स्विच किया जो असलीी चीज़ें समझाता है, पहले साल टैक्स ₹40,000 कम हुआ। अच्छा CA लागत नहीं — मुनाफ़ा सेंटर है।"


एक्शन आइटम्स: आपकी लीगल चेकलिस्ट

अगले चैप्टर पर जाने से पहले चेक करो:

  • बिज़नेस स्ट्रक्चर तय किया (प्रोप्राइटरशिप, साझेदारी, LLP, Pvt Ltd?)
  • PAN बनवाया (प्रोप्राइटरशिप = पर्सनल PAN, बाक़ी = एंटिटी PAN)
  • GST रजिस्ट्रेशन (एप्लिकेबल हो तो)
  • उद्यम रजिस्ट्रेशन (फ़्री है — ना करने की कोई वजह नहीं)
  • शॉप & एस्टेबलिशमेंट लाइसेंस लिया
  • ट्रेड लाइसेंस म्यूनिसिपैलिटी से लिया
  • सेक्टर-ख़ास लाइसेंसेज़ लागू किए (FSSAI, टूरिज़्म, कारख़ाना, आदि)
  • ट्रेडमार्क एप्लिकेशन फ़ाइल किया ब्रांड नेम के लिए
  • की कॉन्ट्रैक्ट्स ड्राफ़्ट किए (साझेदारी डीड, रेंटल समझौता, आपूर्तिकर्ता समझौते)
  • कम्प्लायंस कैलेंडर सेट अप किया रिन्यूअल डेट्स के साथ
  • CA हायर किया (या आइडेंटिफ़ाई किया)
  • इंश्योरेंस समीक्षा किया (फ़ायर, स्टॉक, लाइबिलिटी)

अगले चैप्टर में बात करेंगे उस चीज़ के बारे में जो हर बिज़नेस ओनर सोचता है लेकिन ठीक से करता कोई नहीं: मूल्य निर्धारण। पुष्पा दीदी कैसे तय करती हैं कि चाय ₹20 होनी चाहिए, ₹15 या ₹25 नहीं? अंकिता अपनी पहाड़ी चटनी इंस्टाग्राम ग्राहकों के लिए कैसे दाम करे जो Amazon से तुलना करते हैं? विक्रम रॉयल्टी देने के बाद फ़्रेंचाइज़ी मार्जिन्स कैसे काम करवाए? मूल्य निर्धारण गेसिंग नहीं — साइंस है, थोड़ी आर्ट के साथ।